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दूध का दूध, पानी का पानी

सब कहते हैं शमां जला देती ही परवानों को, कौन कहे कि शमां को जलाया किसने है ? मर्द को औरत पर कितना प्यार आया है दिल नहीं टूटे किसी का हरम बनाया है! वो सहें दर्द तो उनकी नियति है आप करते अहसान, कि जिनकी गिनती है? कहने को तो इश्क में हर चीज़ जायज़ है फिर क्यों कर किसी कि हस्ती नाजायज़ है ? गले में मंगल माथे पर सिन्दूर कहीं सुना था प्यार को बंधन नहीं मंजूर! हर शहर में चमड़े का धंधा होता है सच कहा किसी ने प्यार अंधा होता है? 'अवसर' आने पर उनको पूज लेते हैं असर मर्दानिगी में इज्जत भी लुट लेते हैं? कभी कहते बला है कभी अबला बन गयी कमजोरी तो दल बदला दूध का दूध, पानी का पानी मिलावट नहीं है, अर्थात जनानी आँचल में दूध है, आँखों में पानी (मानवता के बेहतर अर्धांश को समर्पित)

आज महिला दिन है

आज महिला दिन है और मालिक(पूंजीवादी) गिनतियाँ गिना रहे हैं, कहीं कहीं तो मुफ्त मे उनको दारू भी पिला रहे हैं, आप आ पहुंचे हो, दूनिया तैयार है, थोड़े पैसे खर्च कीजिये आज आपका त्यौहार है,   आज आप आसमान पर हैं, चाँद पर आपके पाँव हैं, (कवियों के हिसाब से आप अपने चहरे पर चल रहे हैं) इटली में आपके गांव हैं, विश्व और ब्रम्हाडं सुंदरियां साल दर साल बढती जा रही हैं, बहुत से देशों मे तो उनकी हर साल फसल आ रही हैं और आज तो संसद में भी, महिला बिल पास होने वाला है(मार्च २०१०) (आखिर देश की वाट लगाने की जिम्मेदारी सिर्फ मर्द क्यों लें) और आज ही पहली महिला निर्देशक ने एक ऑस्कर जीता है  और मुझे यकीं हैं किसी छोटी बच्ची, ने कहीं एक झोपडी में आज a,b,c,d सीखा है महारानी अब भी एलिजाबेथ हैं, पर ‘fair and lovely’ फिर भी सफ़ेद है शुक्र है मैंने गणित किया है कभी जिया नहीं, मैं उलटी गिनता हूँ और शुरू शुन्य से आज औरत दिन है? मैं देखता हूँ तो अनगिनत जगह अब भी सिर्फ (dust) बिन है पिछले १५ दिनों में मैंने एक १४ साल की माँ देखी है, और सुनते है कल किसी ने नौ साल की, लड़की ...