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अधूरी बातें!

किस्से बहुत हैं तेरे मेरे अफसानों के, ग़नीमत है के बात अब भी अधूरी है? कहानी पूरी भी नहीं है न अधूरी है, समझ लीजिए कैसी ये मजबूरी है? कोई पूछे ऐसी भी क्या मजबूरी है? ख्वाइशें एक-दूजे से अभी अधूरी हैं! सुबह मेरी है अक्सर रात उनकी है, मर्ज़ीओं को जगह अपनी पूरी है? यूँ तो मान जाएं हर बात उनकी, पर वो कहेंगे ये क्या जीहजूरी है? साथ भी हैं उनके और उनसे दूर भी, आदतों की अपने यूँ कुछ मजबूरी है! गुस्से में भी सारी बात उनसे ही, एक दूसरे के खासे हम धतूरे हैं! अब भी ख़ासा सवाल ही हैं आपस में, आपसी समझ बनने को ये उम्र पूरी है! दोनों के अपने अपने मिज़ाज हैं, साथ कायम होने ये भी जरूरी है! बंजारों वाली तबीयत है, तरबियत भी, और फिर थोड़ा बहकना भी जरूरी है!

अतिशुन्य - गतिशुन्य

“Nothing” is perfect अर्थात 'कुछ नहीं' ही पुर्ण है क्योंकि "कुछ नहीं" में कुछ भी नहीं‌ होता कुछ हो तो वो "कुछ नहीं" नहीं होता और, मनुष्य के पास सब कुछ होकर भी कुछ न कुछ नहीं‌ होता शुन्य अपने आप में पुर्ण है उसे बड़ने घटने की आस नहीं इसी कारण शुन्य का गुणा नहीं भाग नहीं पर मनुष्य को है आगे निकलने की होड़ करता है शून्य के साथ भी जोड़ तोड़ पर हमारी दृष्टि शुन्यता देखो हम शुन्य होने का तैयार नहीं उसकी सहभागिता हमें स्वीकार नहीं मनुष्य को अपनी गलतियों का अंहकार है पुर्णता ढूंढता है पर शून्यता से इंकार है छोटे मुंह, बड़ी बात है पर न चाहें तो भी अपने कर्मों पर अपना अधिकार है और प्रदुषण मस्तिष्क का हो या वातावरण का आजकल जो भी हमारा हाल है शुक्र है जाने-अंजाने लगता है हमारा शून्य होने का विचार है

अधूरापन

मुझे मोक्ष का मोह नहीं न ही सत्य की लालसा है अपने अहंकार से कोई भय नहीं न मुझे मंदिरों की कैद पसंद है न ही अपनी बुद्धि का प्रभुत्व मैं अपने अधूरेपन का उपासक हूँ मैं अपनी गलतिओं से नहीं सीखता न ही अपनी भूलों से पछताता हूँ न मुझे इतिहास की गुलामी पसंद है और न ही भविष्य पर सियासत मैं लम्हों का हिसाब नहीं रखता उम्र के साथ घटना बढना मेरा सामर्थ नहीं मैं अपनी बातों का साक्षी नहीं आज मैं हूँ, कल मैं भी (may be) नहीं मैं अपने अधूरेपन का उपासक हूँ मैं प्रारंभ ही नहीं हुआ अंततः क्या? अनंत से प्यार है अंत से नहीं डरता अपने से प्यार नहीं है पर इंकार भी नहीं चल रहा हूँ पर पहुँचने के लिये नहीं ये अधूरेपन का सफर है अधूरा हूँ नदी बन बहता हूँ कवि हूँ ? इसलिए कहता हूँ मैं अधूरेपन का उपासक हूँ.