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जाने दो!

"ऐसे कैसे जाने दें" ये सोच न आने दें रोकें अपने आप को टोकने से और कदमों को जाने दें आगे गहराई है, डूबने, चढ़ने की, सच्चाई है, कड़वी लगाम नहीं, चाल बदलना, रणनीति है, न की 'हाथ खड़े' न ही 'चिकने घड़े' मढ़ें, अपने सच, गढ़ें नहीं, लड़े नहीं अपने रस्तों से, बदलें, गिरें संभलें मुड़ें, जुड़ें, क्षितिज से वहाँ जहाँ होती है ज़मीन आसमान आसमान ज़मीन सच सही गलत अच्छे बुरे बीच घुटे नहीं! आपकी राय, एकतरफ़ा हो जुटे नहीं, नकारने सपना, दमतोड़ता कोने में आपके दिल के, "जाने दो" ये सोच न आने दो!

सब चलता है!

कहते हैं , चलता है , सब कचरे का ढेर ४ दिन का , अब तक नहीं हिला ,   सड़्कों पर हजारों रहते हैं , उनका सिक्का अभी तक नहीं चला , पानी , नाली का जो रोज़ अटका है , और चलता है प्लास्टिक जिसकी जनसंख्या से हमारी कॉम्पटीशन चलती है , भगवान , हो गयी है हर जगह मिलती है ? मुर्ती उसकी , और  चढ़ावा  बाहर मंदिर के , लाल , पीले , हरे , गुलाबी रंग की पन्नियों में सर्वव्यापी है , और दिन वो दूर नहीं जब होगा सर्वशक्तिमान , क्या समझ के चलता है वो लड़का , किसी भी लड़की के पीछे , और चलता है , पीछा करना , सीटी , छेड़ना और बाहें मरोड़ना , क्यों अगर कुछ रुकता है, तो वो है लड़की का घर से बाहर निकलना , अपने रस्ते चलना , जीना अपनी मर्ज़ी से , देश के सब काम होते हैं , चलता है , सिगनल तोड़ के चलना रुकती है तो बस ट्रेफ़िक में फ़ंसी एम्बुलेंस आखिर जिंदगी मौत हमारे हाथ नहीं , बाकी देशों को ये बात ज्ञात नहीं , नयी गाड़ी का एक नट ढीला चलता है , फ़ैक्ट्री में क्वालिटी चेक अब छोटी छोटी बातों में नुक्स अरे हम इं...