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देखते हैं, क्या?

जिसे देखते हैं,  वो भी देखता है, नज़र मिल रही है,  या बस एक इत्तफाक है, ये वो लम्हा है, जो खास है. और उसके पहले जो पल था, वो भी खास ही हुआ? नहीं तो ये मिलना इत्तफाक न हुआ? और नज़र में आ गए, उसके बाद?  वो भी खास ही हुआ न? नहीं तो वो लम्हा क्या बकवास हुआ? जिसके बाद कुछ न खास हुआ? नज़रिए की बात है,  सच एक लम्हा भी अगर जिंदगी का खास है, तो ताउम्र जिंदगी खास है देख सकें तो देखें, सच तमाम है इर्द–गिर्द, जो आप चुनेंगे, वो ही आपका खास है!!

दुआ है...आमीन!

यकीन है आप अब भी आप होंगे, अपनी मुश्किलों के माई-बाप होंगे! वैसे ही दिल के साफ होंगे, अपनी चाहतों के पास होंगे! ज़िन्दगी गुज़र रही होगी रोज़ाना, और आप हर लम्हा एहसास होंगे! दुनिया बदल रही है तेज़ी से, रोज़ाना आप नए आइनों के खरीदार होंगे! ज़मीं सरकती है पैरों के नीचे, अक्सर इतेमाद!यक़ीनन अपने क़दमों पर होंगे! अपनी ज़रूरतों के तो सब दिलदार हैं, आप अपनी हमदिली के तलबगार होंगे! इस्तेमाल की चीज़ बनी हर खसुसियात, उम्मीद है आप ख़ासियत के बेकार होंगे! सारे रिश्ते और यारी फ़क्त एक 'एप' बने हैं, दुआ है आपके तरक्की से थोड़े गैप होंगे! सारी कामयाबी फक्त कमाई बनी है, ज़ाहिर है आप ऐसी आदतों के गरीब होंगे!