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भक्ति से मुक्ति

तोड़ तोड़ के मस्जिद को मंदिर दिए बनाए, कत्ल कर "अल्लाह" का राम बड़ा बनाए! मस्जिद पर मंदिर बने, मंदिर पर सरकार, संविधान की कब्र खोद रहे, लोग लाख़–हजार! लोग लाख–हजार सर घुटने कर बन गए हैं भेड़, में–में मिमियाते, समझते खुद को भक्ति के वीर मस्जिद में दिखते नहीं, सिर्फ मंदिर में मिलते हैं, ऐसे भगवान तो फकत अज्ञानता में पलते हैं! पहले मंदिर टूटा था इसलिए अब मस्जिद तोड़ेंगे, रैट–रेस में हम सबसे अव्वल आ कर छोड़ेंगे! पंजा हो झाड़ू या कमल, जो मंदिर ईंट लगाए, कौमी राजनीति में फसल काट वो खाए! फसल काट वो खाए, सौ कतल भी माफ़, शैतान गद्दी बैठे, बेईमान को मिले इंसाफ!

टुकड़े टुकड़े भारत!

मैं टुकड़े टुकड़े हूं, मैं भारत हूं, किसी की आदत, कोई बगावत, किसी की शिकायत, किसी की नज़ाकत किसी को जमीन हूं, किसी की जानशीन, किसी को मोहब्बत हूं, किसी की हुज्जत हूं, दिन रात, देर-सबेर, मैं एक नहीं हूं, कभी था ही नहीं!

365 दिन, कश्मीर बिन!

365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद? और आपको ज़िंदगी से कोई शिकायत? 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, देश में चलती राममंदिर की कवायत! 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, ये  लोकतंत्र पर भद्दा पैबंद! 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, TV पर देखा आपने, होकर तालाबंद! 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, और आपको अच्छे दिनों की ख़बर होगी? 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, फेक एनकाउंटर से आप बहुत खुश होंगे? 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, इस बात पर कब दिए जलाएंगे आप? 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, और आपके बच्चे क्या खेल रहे हैं?  आजकल?। 365 दिन कश्मीर कैद में है, नज़रबंद, आप क्या अब भी हिंदुत्व के गुलाम हैं?

बेकार सरकार

(नागरिकता कानून, दिल्ली चुनाव और दंगे) नफ़रत के व्यवहार, अब सरकारी हथियार हैं, गद्दी पर बैठ मज़े लूटें, अब ऐसे जिम्मेदार हैं! (लॉकडाउन और मजदूूूर, मज़लूूूम) परवा नहीं मज़लूम की, कैसे ये हमदर्द हैं? मुँह फेर कर बैठे है, जो 56 इंच के मर्द हैं! जो सामने है वो झूठ है, सच! बस मन की बात है! लूट गई दुनिया लाखों की, ख़बर है, 'सब चंगा सी'!! (ऊपर से ताली, थाली, दिया) दिखावा है, भुलावा है, जो सरकारी दावा है, ताकत का नशा है और चौंधियाता तमाशा है! सरकार सर्वेसर्वा है, सर्वत्र, सरसवार, जिम्मेदारी की बात करी तो, छूमंतर, उड़न छू, ओझल! हज़ारों जंग हैं और लाखों लड़ रहे हैं,  सरकारी रवैये के ज़ख़्म से मर रहे हैं! सब ठीक है, कुछ भी गड़बड़ नहीं, बॉर्डर पर कबड्डी कबड्डी खेल रहे हैं? अपनी टीम के 20 गंवाए? ये किसकी तरफ से खेल रहे हैं? चश्मा बदला है या नीयत बदल गयी है, या हमेशा की तरह जुबान फिसल गई है? हर तरफ पहरे हैं, क्या राज ऐसे गहरे हैं? गुनाह छुपाने वो तानाशाह हुए जाते हैं!

हमारी सरकार - एक आत्मकथा!

हाथ पांव में दम नहीं हम किसी से कम नहीं बॉर्डर पर कुछ उठापटक हमको उसका गम नहीं, मर गए मासूम जवान, घड़ियाली आंसूं हमरे भी सच में आंखें नम नहीं? हम पहले ही बोले थे आज लड़ने का मन नहीं! बोलने में हम सबसे आगे, करने धरने का दम नहीं, धर्म के नाम के धंधे सब उसमें कोई सरम नहीं, फल की चिंता हम न करते, इसलिए कोई करम नहीं, काम चल जाएगा झूठ से, इसमें हमको भरम नहीं! ताक़त ही सर्वेसर्वा है, दिल के हम नरम नहीं! पत्रकार सब पालतू पिट्ठु सो कब्ज़ा सच पर कम नहीं! बहका दे सब पब्लिक को, इस बारे कोई वहम नहीं, विरोध को ही खरीद लेते, पूछो, किसकी ज़ेब गरम नहीं? मजबूर की क्या मदद करना, अबे! हमको काम कम नहीं? काल मरे से आज मर, आज मरे सो अभी! हाथ पे हाथ धर मंत्रीगण, चमड़ी मोटी कम नहीं! वादे झूठे थे सब के सब हमारा निठ्ठलापन नहीं,  आप मान कर सच बैठे,  मूरख आप कोई कम नहीं!

रास्ते मजदूर

(पैदल मजदूर) किसी का दर्द हमको कभी परेशां ने करे, या खुदा हालात मुझे ऐसा इंसान न करे! लाखों को सडक़ पर लाकर छोड़ दिया, एक के साथ भी ऐसा बुरा अंजाम न करे! सामने आने तक ज़ख़्म ज़ाहिर न हों, सोच मेरी तू आँखों का माजरा न करे! शहर में था तो मेरे बहुत काम आया, (वो)तहज़ीब कहाँ जो उसको पराया न करे! (मेरी प्रिवलेज) मेरे आराम का उसके पसीने से वास्ता कोई? मदद हो मेरी पर मुझको मेहरबाँ न करे! आबाद होने को वापस यहीं बुलाएंगे, अभी ये इल्ज़ाम की शहर को कब्रिस्तान न करे! (कोरोना! बाप रे! तबलीकी, जमात, जिहाद जिहाद) मुश्किल में थे तो हमारे मुसलमां जा बने, नफ़रत को कोई सोच यूँ आसां न करे! अपने ही दर्द को कुर्बान हो गए रास्ते में इस ख़बर को कोई अब पाकिस्तान न करे! (पीएम केयर, कब और कहाँ?) मदद करने को ख़ज़ाने खड़े हो गए, इन दिनों वो क्यों इस तरफ रास्ता न करे? खुदा बनने को मेरे तैयार हैं कितने देखो, शिकायत पुरानी क्यों मुझे मसीहा न करे?

करोना पुराण!

जय श्री राम करोना,  भारत मां जय करोना,  देशभक्ति करोना,  बीमारी करोना? कोई इलाज़ करोना? नया दौर है, नयी बात करोना? प्यार सच में है तो दूर रहो न! मत छूना बात बड़ जाएगी,  सच है अगर तो दिल से करोना!! टाइफाइड, टीबी, मलेरिया, डेंगू , पूछ रहे ये कौन कॅरोना? बरसों का साथ है हमसे ही मरो न! देखत सुनत समझ न आई, कॅरोना की खबर जो आई, व्हाट्सअप कल्याण दिलाई, गौमूत्र गोबर हमही लेआई!! न करो कि कॅरोना ये दुविधा आई, अस्पताल से मरीज भाग जाई! साथ भी है और दूर भी, क्या करें? कुछ कॅरोना! अकेले हम अनेक हैं, साथ रहे तो अकेले! करें क्या ये सवाल है,  जो समझ आए करोना!! मत और राम राम कॅरोना कुछ काम की बात कॅरोना! नफ़रत की बस हुई बातें, किसी के भले की बात कॅरोना!!

कश्मीर आई सी यू से!

दो कौड़ी के सब इंसान कर दिए, सरकार ने यूँ फ़रमान कर दिए! हवा, पानी, जमीन, आसमान, अरमान,  कैद कर दिए, कितने आसान काम!  लाठी है हमारी तो सच भी हमारा है, घुटने टेकिए आपके पास क्या चारा है? दिल तोड़ दिए, ज़हन बांट दिए सियासत ने तमाम धागे काट दिए! कश्मीर शिकार करके उसे त्योहार कर दिया, किस तरह जनता को सोच का बेकार कर दिया! ईद किसको मुबारक करें, आवाज़ नदारद है, "खुश होना है" तामील हो! सरकारी इबारत है! ज़ुबान पर ताला है, चाबी नज़रबंद है, ताले टूटेंगे मत कहिए ये हुड़दंग है! सुना है सब आज़ाद हो गए, क्या मजबूरी के आज हो गए? बंटवारे के बीज बो दिए, बात एक कि करते हैं। शैतान लोग ही बढ़चढ़ बात नेकी की करते हैं! आज़ादी के अंधे सारे, बरबादी नहीं दिखती, बंदूकों से कैद एक पूरी आबादी नहीं दिखती? खुशी को मुल्तवी किया, चैन अगवा है, ज़िंदगी सस्पेंशन में है, इंसानियत हज़ार कत्ल है! सिपाही, बंदूक, कानून तमाम,  और आज़ादी ताकत की गुलाम!

मैं प्रिविलेज!

  मैं धर्म और जात हूँ, सरकारी हालात हूँ, मेहनत का मज़ाक हूँ, मक्खन मलाई औकात हूँ! मुझे क्या फर्क पड़ेगा, तबरेज़ की रामहत्या से पायल के जातमत्या से मैं मिडिल क्लास हूँ!! मैं शहर हूँ, अपार्टमेंट घर हूँ, आरओ से तर हूँ, बस्ती से बेख़बर हूँ! स्लमबाई काम करती है, माफ़िया टैंकर पानी भरती है, मैं क्यों अपना हाथ लगाऊं, कचरा गीला सूखा बनाऊं? बस ट्रेन में ए.सी. हूँ, बाज़ार में निवेशी हूँ, मर्ज़ी जो परिवेशी हूँ, क्रेडिट कार्ड का ऐशी हूँ! मर्द मर्ज़ी मूत्र हूँ, पितृसत्ता पुर्त हूँ बाप, भाई, पति ताकत का सूत्र हूँ! जात में "नीच" नहीं, औकात में बीच हूँ, मर्द बीज हूँ त्योहार तीज हूँ! मैं हिंदी भाषी हूँ, मतलब खासमख़ासी हूँ, बहुमत की बदमाशी हूँ, जन्मसिद्ध देशवासी हूँ!

सचमुच! काफ़ी बड़ा है?

भारत एक बड़ा देश है....निहायत ही, महज़ आकार में फक्त प्रकार में, सबसे छोटा क्या है? हमारा दिल? या हमारी सोच? बड़ी स्पर्धा है दोनों के बीच, परंपराएं कितनी, बताती हैं एक सोच बड़ी नीच! और सोच की क्या बात है, सोच सती है, अबला है, कमाल की बला है, पैदा हो न हो, तय फैसला है! सोच द्रोपदी का चीर है, दोनों ओर मर्दानगी तस्वीर है! सोच ही समझ है, सच है, राम नाम सत्य, सीता अस्त! दिल की तो मत पूछो इसमें आने को, जाती ऊँच, रंग पूछ, लड़की करो कूच... नेकी? पर पहले पूछ? जात, धर्म? कर्म? कहाँ है मर्म? आंखें खोल, किसी भी शहर, दो-चार कदम चलिए, और मिलिए, हासिओं से (मार्जिन), कचरों के ढेर से  तरक्की की दुसरीं ओर, बसाए हुए, सुलभ शौचालय  और दुर्लभ विद्यालय पर कतार लगाए आपके बर्तन, झाडु-पोंछा से, आभारी! उम्र लंबी है, कभी आऐगी बारी, बस मेहनत करते रहो परिश्रम का फल मीठा है, प्लीज़ डोंट माइंड, ज़रा झूठा है!! आपकी शराफ़त  न ही लुटा है!!

मेहमान नवाज़ी!

उनकी दुआ में जिक्र हमारा था, खुदगर्ज़ जुबां से आमीन निकले! सरहदें जिनको ख़ामी नहीं करती, दोस्ती दिल से ओ दुआ आमीन निकले! अपनों की ये क्या शिकायत है, क्यों अज़ीज़ अजनबी निकले! न कोई गिला न शिकायत कोई, बड़े अपने, सब अजनबी निकले! हमसफ़र सब अजनबी थे, बड़े आसां ये सफर निकले! दिल जीत लिए,बड़े, शातिर मेहमाँ निकले! अज़ीज़ सारे इतेफ़ाक़ निकले दिलों के सब साफ़ निकले

भारत माँ की.....

भारत माँ की बेटियों को पेट में मारा जाता है, जय भारत माँ की जमीं पर जीवन उगाने वाले आत्महत्या कर रहे हैं, जय भारत माँ की, साँसे फूलती हैं तरक्की के धुँए से, जय भारत माँ की, औकात एक मज़हब, एक भाषा तक सिमटा दी, जय भारत माँ की, बेटियां बाज़ार में जिस्म बेचती है, और बेटे खरीद रहे हैं, जय भारत माँ की, ठेकेदारी, गुंडों के हाथ पड़ गयी है, जय भारत माँ की, इंसानियत एक जात है, यहां पैदा होना अपघात है, जय भारत माँ की, रसोई एक अखाडा है, गाय ने इंसान को पछाड़ा है, जय भारत माँ की, शिराएँ (नदीयाँ) श्री नाला बनी है, शंकर को रवि का श्राप लगा है, जय भारत माँ की, औलादें, सड़क किनारे और स्टेशन प्लेटफॉर्म पर बीड़ी मारती और डंडे खाती हैं, जय क्या आप को अब भी लगता है? भारत एक माँ है? या ये कहना गुनाह है? आपकी भी जय!!

जाओ भरसाई में ......

उनका शहर देख लिया, दोपहर देख लिया, रोशनी वहां भी है, अँधेरे भी होंगे, गुम होने को कई कोने भी होंगे, अँधेरे यहाँ भी बहुत हैं, पर गुम नहीं हो सकते, सच्चाईयां सर सवार हैं, और भीड़ ज्यादा है, कंधे रगड़ रहे हैं,  कब किस की मुश्किल अपने कंधे आ जाये और वहां खामोशी कितनी है, चाहें तो  अपने ही ख़्वाब सर चढ़ बोलते हैं, और यहाँ बारिश हो तो आँखे गीली करते हैं, मुल्क है कोई और  या जैसे मुरख को आइरनी(IRONY)  समझाने  कसर न रहे ये सोच थी? सड़कों पर जगह बहुत है  लोग कम पड़ जाते हैं, पुराने शहरों को चमका के रखा है,  इतिहास किताबों में होता है सुना था, काम चार दिन होता है  और दिन छोटे?  जाहिर सवाल है, इन लोगों को कोई काम नहीं? और दवाइयां भी मुफ्त, पता नही सब बीमार क्यों नहीं पड़ते...? हमारे यहाँ बांटो,  भले-चंगे लाईन में नज़र आयेंगे, दवाई दावतों में खिलाएंगे, अज़ीब दुनिया है, कहीं समंदर है आराम, और कहीं जीना हराम, चक्रवात तूफ़ान शायद किसी पागल ने बनाई है, अब क्या बोलें जाओ भरसाई में !

मेरा भारत महान !

भारत एक देश है या बेबसी में वैश्या बनी माँ का भेष है एक ही सच का सब ऐश है हर मुश्किल का हल सिर्फ कैश है लो कर लो बात! बदलाव को क्या चाहिए लात या हाथ, मज़बूरी के हाथ, ताकत की लात, कुछ लोग मनवा लेते हैं अपनी हर बात , गरीबों हटाओ, मंदिर बनाओ सवाल ? देश नक़्शे में खिंची लकीरों से परिभाषित है या रहने वालों की आशाओं से उजागर या पस्त हुई सांसों में अस्त बड़ी सड़कें, ऊँचे मकान, सुगर फ्री पकवान, विदेशी कंपनियां, अप्रवासी भारतीय मेहमान, मेड इन इंडिया सामान विदेशों में बिकता है, गेहूँ गोदामों में फिंकता है आज हमारा बाजार गरम है बस शर्त इतनी है की त्वचा गोरी ओर नरम है, हाँ, हैं कुछ लोग जो तरक्की के साथ नहीं चल पा रहे नींद नहीं आती, इसलिए सपने भी नहीं आ रहे, जाहिर है, देश को आगे ले जाना है तो, नज़र अंदाज़ करना होगा! उस वर्ग को, जो अपनी भूख को ही खा रहे, सच है, गरीबी भी एक नशा है, एक बार चरस छुट जाये, पर गरीबी, ये नशा, जो ना करवा दे वो कम, माँ, बेटी को सजा रही है, ये भारत देश है या बेबसी में वैश्या बनी माँ का भेष है!