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बस यही बात है!

  साथ है बस यही बात है हां कई जज़्बात है,  जज़्बात काफूर हैं साथ हालात है, साथ है बस यही बात है! साथ है, दिन है, रात है, काम की बात है,  ज़ाहिर मुश्किलात है, मुश्किल कम’उम्र है, साथ सफ़र है, साथ है बस यही बात है! साथ है, मुलाक़ात है, तुमसे तो, खुद से भी, अजनबी फिर भी कई लम्हात हैं, बाक़ी कई बात हैं, सो साथ हैं  बस यही बात है! साथ हैं, सवालात हैं, तमाम जवाबों के, जो अधूरे हैं, जो बदल गये, कुछ फिसल गए, छूटे नहीं हैं, साथ हैं, बस यही बात है!

रास्ते!!

  यूं गुजर रहे है की जैसे रास्ता हैं, कुछ होना नहीं, कुछ बनना नहीं, साथ सब के हैं, किसी के हाथ नहीं, अगर मुश्किल हो  तो वो रास्ता नहीं, रास्ते किसी के रास्ते नहीं आते, और कभी भटकाते नहीं हैं! रास्ते कहीं जाते नहीं हैं, कहीं पहुंचाते नहीं हैं, रास्ते बस शून्य हैं, अपने आप में कुछ नहीं, पर कोई साथ ले, तो सौ-हजार हैं, जरूरी हमसफ़र है, आपसी व्यवहार हैं! अपने कदमों से पूछिए! क्या वो इस दोस्ती तैयार हैं? मंजिलों से घिरे हुए हैं, फिर भी रास्ते आज़ाद हैं, जो ये समझ जाए वो मुसाफ़िर है, सफ़र ही उसका आख़िर है, समझ पाएं तो, जिंदगी भी एक रास्ता है, आने और जाने के बीच से गुजरते, रुकने का सोच रहे हैं? मूरख, आप जागते भी सो रहे हैं!!

हमरास्ता!

  दूर आए, नजदीकियों के नज़दीक आ गए, फ़ांसले नहीं हैं फिर भी करीब आ रहे हैं! नज़र को नज़र में नज़र आ रहे हैं, दोनों ही अपने शौक फरमा रहे हैं! मिल कर मन के मौसम बना रहे हैं, और वहीं हैं हम, जहां जा रहे हैं! पहुंचना नहीं है कहीं पर जा रहे हैं, मुश्किल हैं रास्ते पर रास आ रहे हैं! मंजिलों के सौदागर बस बहका रहे हैं, रास्ते कहां जाएंगे, हम कहां जा रहे हैं? हम फकत इन रास्तों से आ जा रहे हैं, यूं धूप–छांव दोनों शौक फरमा रहे हैं! रास्ते ही हमको ठहरा रहे हैं, पूछें  पहुंचना नहीं है तो कहां जा रहे हैं?

चौबीस दूनी...?

चौबीस दूनी अड़तालीस, अब भी उतनी ही ख़ालिस, वही प्यास, वही आलस (सुबह 6 बजे) न गुस्सा कम, न प्यार, बातें चार, मर्ज़ी से मन और मर्ज़ी से लाचार, घर का अचार, सुविचार!! रंग बदले हैं (समझ जाइए) पर ढंग नहीं, साथ बदला है पर संग नहीं, ताकत बढ़ रही है, कमजोरी कम नहीं होती, कितनों का यकीन हैं, नज़र महीन है, कदम कदम चाल है, और उफ़क़ परे ख्याल है दर्द गहरे हैं, और क्या, वही ख़ास है अब वज़ह, सवाल मासूम हैं, "ऐसा क्यों नहीं? समझते क्यों नहीं?" रास्ते दिखते हैं पर कदमों से दूर हैं, सौ मजबूर हैं, पर हाथ खड़ें नहीं हैं, कंधे झुके नहीं हैं, उम्मीद ज़ारी है, जो बन पड़े , बुनते हैं बड़े गौर से सुनते हैं, साथ उनके, सब सपने बुनते हैं! रास्ते अभी भी वैसे ही,  तय नहीं हैं, कहीं पहुंचना है ये चलने की वज़ह नहीं है! रुकना वज़ह है केवल, कोई तय जगह नहीं है! अजनबी नहीं हम,  आप पहचानते नहीं हैं, आपके आइनों को हम मानते नहीं हैं!

भूल-चूक, लेनी-देनी!

जो गुज़र गया एक ख्वाब था जो रह गयी एक याद है! जो गुज़र गयी एक आस थी जो रह गयी एक प्यास है! जो कह डाली वो बात है, जो बची वो तन्हा रात है! जो मिल गया एक साथ था जो खो गया वो प्यार है? जो ठहर गया एक पल था जो गुज़र गया वो वक्त है! जो टूट गया एक तार था, जो रह गई एक झंकार है! जो है वोही सब हालात हैं, संभले नहीं वो जज़्बात हैं! तुम हो तो सारी बात है,  जो नहीं तो वोही बात है! जो दब गई वो आवाज़ थी, जो बच गई वो खमोशी है!

हर सफ़र हमसफ़र!

हम सफ़र के हमसफ़र हैं हर सफ़र के वास्ते, हर तरह के हमसफ़र हैं हर सफ़र के वास्ते!! चलना तो शुरू कीजिए, कदम आस्ते, आस्ते, मिल जाएंगे हम जब साथ आएंगे अपने रास्ते! साथ चलते चलते बनेंगे हमसफ़री के रास्ते ये सोच कर चल पड़े हम हमसफ़र के रास्ते! क्या चलें, किस मोड़ मुड़ें, आसां नहीं ये रास्ते हर मोड़ पर मिल जाएंगे हमसफ़र के वास्ते! हमसफ़र से जो सफ़र हैं बस सफ़र के वास्ते, कहाँ जाएं, कब पहुंचें इससे नहीं कोई वास्ते! कहां जाएं, कहां पहुंचे और किस के वास्ते? रास्ते कुछ तन्हा, कुछ हमसफर के साथ के!

मोहब्बत के काम!

मोहब्बत क्यों ये मुश्किल काम है? पहलू में उनके सुकूँ, आराम है! क्यों दुनिया में आशिकी बदनाम है? उनकी शिकायत, ये जरूरी काम है! फिक्र है मेरी ये उनका काम है, ये समझ लेना सफर का नाम है! आपस में दोनों खासे बदनाम हैं, आ गया गुस्सा तो खासे आम है! सब शिकायत है मेरी ख़ामोशी से चुप हैं हम और खासे बदनाम हैं! नज़र जब भी नज़रिया बन जाए, समझ लीजे किसी का काम तमाम है! ज़िंदगी जी रही है ख़ूब दोनों को, हम हैं साकी और वो जाम है! मोहब्बत गहरी पहचान है, सुबह मेरी ओ उनकी शाम है! एक-दूजे को मुश्किल-ए-आसान हैं! चैन भी हैं ओ कभी चैन-ओ-हराम हैं!

खामोश बातें!

मत कहो हमसे, कुछ कहने को, आज बस हमको चुप रहने दो... क्या है कहा नहीं जो, क्या है सुना नहीं जो, क्यों वक़्त को अपने हालात बनाएं, जो है वो भरोसा रहने दो! आज बस हमको चुप रहने दो... कुछ शिकवे हमारे जो कुछ उनकी शिकायतें वो, ये हसींन मुश्किलें क्यों सुलझाएं, जो हैं जज़्बात रहने दो! आज बस हमको चुप रहने दो... सच अपने सपने हैं जो, सपने जो उनके सच हैं! वो ये फ़र्क किस किस को समझाएं? कुछ तो बिन-बात रहने दो आज बस हमको चुप रहने दो... इतने नज़दीक हैं जो, दूरी उतनी हो क्यों, पास से फासलें यूँ नज़र आएं, आपस की बात है रहने दो! आज बस हमको चुप रहने दो!!

कुछ और सफ़र!

a एक और सफर एक और डगर एक और नज़र एक और असर! एक और सुबह, एक और दोपहर, जी भर के किए, फिर कुछ और कसर? ख़ूब नज़ारे, वक्त ख़ूब गुजारे, रह रह के इशारे, क्या है जो पुकारे? बहुत दूर आ गए, कहीं!? बहुत नजदीक आ गए, कहीं!? अगर यही है ज़मीं? फिर क्या है कमीं? क्या छूट नहीं सकता? क्या छोड़ नहीं सकते? क्या जुटा नहीं है अभी? क्या जोड़ नहीं सकते? वो भी हम थे ये भी हम हैं, बहुत ज्यादा थे वहां, यहां थोड़े कम हो गए, फुर्सत से बैठे और हम हो गए!! वहां खुद से शिकायत थी, यहां खुद से गुजारिश है, जो मर्ज़ी है अपनी, वो हो अपनी नवाज़िश है! आगे और भी जाना है? ये कैसा बहाना है? कुछ खो गया है कहीं? या कुछ और गवाना है? हाँ! सफ़र और भी है! डगर और भी हैं, नज़रिया एक यही है, अभी असर और भी हैं, जी तर गया ये सोच, अभी कसर और भी है!!

ज़ाहिर बात!

हमसे ही हमारी बात करते हैं, हम भी उनसे ये शिकायत करते हैं! हम नहीं जज़्बात ज़ाहिर करते, वो हमसे यही हिदायत करते हैं! नींद ही ऐसी के बिछड़ जाते हैं, और वो सपनों की बात करते हैं! काम, नाम, आराम सब साथ है, झग़डे, तो हम मशवरात करते हैं! लंबा सफर है, हो चला और बाकी हम कहां मंज़िल की बात करते हैं! अकेले भी दोनों अच्छे खासे हैं! साथ में तो हम कमालात करते हैं!! अरसा हुआ अब सारे एब ज़ाहिर, उम्मीद से रोज़ मुलाक़ात करते हैं! एक हैं पर एक जैसे नहीं, फ़र्क, हमें समझदार करते हैं

मोहब्बत!

मोहब्बत क्यों ये मुश्किल काम है? पहलू में उनके सुकूँ, आराम है! क्यों दुनिया में आशिकी बदनाम है? उनकी शिकायत, ये जरूरी काम है! फिक्र है मेरी ये उनका काम है, ये समझ लेना सफर का नाम है! सब शिकायत है मेरी ख़ामोशी से चुप हैं हम और खासे बदनाम हैं! नज़र जब भी नज़रिया बन जाए, समझ लीजे किसी का काम तमाम है! ज़िंदगी जी रही है ख़ूब दोनों को, हम हैं साकी और वो जाम है! मोहब्बत गहरी पहचान है, सुबह मेरी ओ उनकी शाम है!