सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

बेघर लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

काम तमाम!

आजकल बड़ा आराम है, कहां कोई काम है, न काम की चिंता, न चिंता का काम, वो कोई और हैं, जिनका काम तमाम सब कुछ चलता है, हमेशा से चलता रहा है, वही पुराना ढर्रा, लकीर के फ़क़ीर पीटते लकीर, सांप सूंघ गया है, जिम्मेदार कौन? क्यों शोर जय जय है? किस बात का भय है? सच की क्या जगह है? देश किस को कहते हैं? क्यों लाखों भूखे रहते हैं? बेघर हैं? देश की छोड़िए? अपना सर झुका लेते हैं! शर्म से ! और क्या कहें, भूख सामान बन गयी, सस्ती श्रमिक जान बन गई, रास्ता भूल गई ट्रेन या दिशाहीन सरकार बन गई! कानून कहाँ है ? किसका कानून ? किसके हाथ में है? किसने हाथ लिया है? किस पर चला है ? कमजोर बस हाथ मला है ! निसर्ग आया तूफ़ान की तरह,   और गुजर गया, हमारा कहाँ कुछ किधर गया? फूल बिखरे चादर बन, और किसी का संसार उजड़ गया!

जान है तो पान है!

जान है तो जहान है ये मूर्खता का ज्ञान है, सरकार ने कहा है तो अंधभक्तों का कान है मिडिल क्लास की रट मेरा भारत महान है! ओ रईसों की वाइन है चमक है शाइन है! भूख में क्या शान है? भीख है या दान है? किसका इसमें मान है? न जमीं अपनी, अजनबी आसमान है, सारे मजबूर एक छत में कहते हैं आप, ध्यान है? मुट्ठी भर चावल, दाल कहाँ? न सब्जी का नामोनिशान है? चल पडे हैं मीलों, कोसों, बेदिल आप उनको कोसें? जानिए, मनोविज्ञान है, जो उनका जहान है वो ही उनकी जान है! गांव, घर, परिवार,  गली चौबार, अपना  समाज व्यवहार सब मिल कर जान है? कोई टापू नहीं अकेला एक पूरा इंसान है! भरोसा किस पर करेंगे? काम बचा नहीं, सरकार सोचा नहीं, बंद हैं बस, ट्रेन, कहते है लॉकडाउन है? लाखों सड़क पर, फ्लायओवर सर पर, थोड़ा मिला बहुत समझना कहाँ कोई सम्मान है? हथेली पर जान है, दोगला जहान है, कारों में, बंगलों में ए सी ऑन है!! किसकी जान है? ये कैसा जहान है? क्या आपको तनिक भी इसका भान है? बंजर है जमीन किसकी? किसकी उम्मीद शमशान है?  भीड़ में अकेले ओ सारे रास्ते वी...