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हम आप आज कल!

वो ज़हर जो हमको क़ातिल करता है, रामबाण है, अचूक असर करता है! कौन है जो दिल ये नफ़रत भरता है? आप ही आइए जहां हम मिलते हैं ! अलग चाल है सबकी और चलते हैं!! रिश्ते क्यों हम को अलग करते हैं? जो भी ख़बर मिली वो ही सच है? बुरी है बात और किसी के सर है! डर और नफ़रत आपके घर है! किन रंगों से आईने रंगवाए हैं? क्यों नफ़रत नज़र नहीं आए है? सड़क पर मार दिया ये न्याय है? रामराज्य, राम नाम, आसाराम, बाबाराम, घोर कलयुग है और ये सब राम के काम? सोच, तर्क, विज्ञान का तो काम तमाम! धर्म का धंधा, खरीददारी चंदा, राम नाम में बढ़े फायदे में बंदा, घटिया नीयत और काम गंदा!

सच के दरम्यां!

सच्चाई इश्क़ है, इंतज़ार है, दूर देखिये ज़रा इकरार है! सच्चाई यकीं नहीं है, न जाती जमीं है, कभी मर्ज़ी है किसी क़ि, कभी इत्तफ़ाक़ हसीं है! सच्चाई तस्वीर नहीं है,  न ही ज़ंजीर है, कभी शम्स उफ़क़ पर, कभी दिल में शमशीर है! हर लम्हा एक बयां हैं, हर सुबह एक दास्ताँ, सब कुछ यहीं है, बीच जमीं और आसमाँ!! सच्चाई 'कुछ' नहीं है, और 'कुछ नहीं' भी, कुछ 'हाँ' भी है, बहुत, ओ' कुछ 'नहीं' भी है!! सच्चाई ज़ाहिर है, हर सुबह की तरह,  और हर सुबह अलग होती है,  आप क्यों‌ एक ही बात पर अड़े हैं, हर जिद्द के नीचे मुर्दे गड़े होते हैं!  हर हक़ीकत हरदम सच नहीं होती, हर झूठ हक़ीक़ी न हो यूँ भी नहीं, सब ने अपनी-अपनी गठरी बाँधी है, कहने से साबित कुछ नहीं!