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बेकल मन!

मैं उदास हूँ, कल था, आज हूँ, आस हूँ, प्यास हूँ, उम्मीद से हताश हूँ, मैं ख़ास हूँ, फिर भी, अपने ही सवालों से बदहवास हूँ, अकेला, अपने साथ हूँ, और भी हैं, बात करने को, पर आखिरकार दिन लंबे हैं और रात, बोलती है, और न जाने कैसे, दिलोदिमाग  के सारे अंधेरे कोनों में गूंज उठती है, उनका सामना करती अपनी ही मुस्कराहटों से थक चुका हूँ! सच चुका हूं! अपनी कामयाबी से,  जो मेरे चारों तरफ है, सामान बनकर, जेब में पड़ीं दीवारों पर जड़ी, लाइफ़ साइज़ तस्वीरें,  मुझे ही क्यों छोटा करती हैं? कितनी चमक है मेरी, मन बहलाती कभी मुझे ही झुठलाती, आगे क्या है? मेरी क्या वज़ह है? मेरी क्या जगह है? सपने, जो मैंने पाले हैं, दिल पर उसी के छाले हैं! अपनी ही मुस्कराहट से उदास हूँ, लगता है अपने पास हूँ, और दूर तक रास्ता नहीं कोई, इसलिए चलता हूँ! बहुत उलझाते हैं ख़याल, सवाल, इसलिए निकलता हूँ! यही एक रास्ता दिखता है, जो मुक़म्मल है! इसमें कहाँ कोई कल है, आज मन बड़ा बेकल है! चल!

कशिश - ए- खुदकशी!

मौत कितनी आसान है, जी करता है खुदकशी कर लूँ! जिन्दगी विस्तार है  दो हाथों में नहीं समाती , मौत आसान है, बाँहों में भर लूँ जिन्दगी कितनी लाचार, कितनी मोहताज़ है मौत का हर तरफ राज़ है  मौत जिन्दगी का ताज है  जिन्दगी मोह है, मौत सन्यास जिन्दगी अंत है, मौत अनंत  मौत पर न कोई राशन है, न प्रतिबन्ध  जिन्दगी है, न ख़त्म होने वाली लाइन का द्वन्द जिन्दगी अमीर है, गरीब है बेमुश्किल खरीद है मौत आसानी से हासिल  जिन्दगी के बदले की चीज़ है  जिन्दगी, कमज़ोर दिल वालों के बस की बात नहीं  मौत का कोई मज़हब, कोई जात नहीं जिन्दगी जड़ है, झगड़ा, फसाद है  सबको एक जैसी मौत को दाद है  आखिर कहाँ पहुंचा हमारा उत्थान है  कि मौत आसान है, फिर भी, जिन्दगी के पीछे दौड़ता इंसान है जो जुल्मी है, पापी है, शैतान है  उसी का सम्मान है! सरल, सहज, समान, हर एक को एक ही दाम मौत आसान है, इमान है  बिन मांगे मिल जाये वो सामान है सच कहते है, घर कि मुर्गी दाल बराबर ! पर क्या करें, जिन्दगी लालच है...