सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

दाम लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दाम दमन !

हट्टे - कट्टे सारे इकट्ठे , शॉपिंग की तो जेब कटे दाम चीजों के बड़े - बड़े लुट गये बाज़ार में खड़े - खड़े चिल्लर साली संभाल तू दाल - रोटी के पड़े लाले सपनों पे अब लगे ताले , स्कूल की फ़ीस ,  सेहत /health  को चीज़ उपर वाले से पुछें क्या  "what's up re” ढीली कमर से खिसके है चड़्डी - चड्डी साला इज्जत उतारने को  always ready हर एक रेट कमीना होता है , बड़ा सस्ता आज कल पसीना होता है , मुश्किल मंहगाई में जीना होता है बड़ा लंबा हर एक महीना होता है , उंची दुकान और फ़ीके पकवान पैसा भगवान और पैसा पहलवान दो कौड़ी का ईमान रे dogy  लार टपका बोले  "what's up re” देख मुँ में मेरे हड़ड़ी - हड़डी साला इज्जत उतारने को  always ready हर एक रेट कमीना होता है लड़्डु - पेडा जैसे नगीना होता है , दुसरे को लूट कर ही जीना होता है हर एक रेट कमीना होता है अपने ही हाथों वो खुद को मारें खेत सूख गये जो इनके सारे पैसा सरकार है ,  मेहनत बेकार है शहरों में आयेंगे ,  स्लम नयी बनायेंगे खायेंगे रोज़ अमीरों की गाली ...