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अजीब दिन!

इन दिनों कुछ हम अजीब हो गए हैं ख़ुद के कुछ कम अज़ीज़ हो गए हैं!. नज़दीकी के सब लम्हे घुड़सवार हैं, ऐसे अब हम नाचीज़ हो गए हैं! हर बात के लिए अब वक्त काफ़ी है, बड़े फुरसती अपने नसीब हो गए हैं! अब सारी बातें हवा में हो रही हैं, यूँ लोग इस दौर क़रीब हो गए हैं! घर बैठे सब ख़ानसामा बन गए हैं, जायके आज सारे लज़ीज़ हो गए हैं! तन्हाई के सारे मायने बदल गए हैं,  घर के आईने सारे रक़ीब हो गए हैं! हाक़िम की ज़िद्द की वो हकीम हैं! मुल्क कितने बदनसीब हो गए हैं! मजलूम सब सामान बन गए हैं,  खरीद-फरोख्त की चीज़ हो गए हैं! यूँ लगता है पूरा दौर ही बीमार है,  सोच के अपनी सब मरीज़ हो गए है!

टाईमपास!

वक्त टूट कर बिखरा पड़ा है, कहीं छोटा कहीं बड़ा है, 'तर', कहीं प्यासा पड़ा है, आख़िर में चिकना घड़ा है, कोई भी लम्हा कब तड़प उठता है, कोई पल मुँह बाएं खड़ा है, कोई घड़ी, हाथ से फिसलती है, कोई सदी बन टिकी है, कोई इंतज़ार उम्र होता है, कोई पलक झपकते गुम, और इस खेल में कहाँ हैं हम? कभी वक्त फ़ायदा है, कभी सारी मुसीबतों की जड़, कभी हाथ नहीं आता, समय, कभी मौसम बन छा जाता है, किसी को रास नहीं, किसी को भा जाता है? किसी के गले तलवार, किसी के लिए घुड़सवार, किसी के पास समय नहीं, बिल्कुल भी, वक्त किसी का बचा नहीं, हमें कुछ हो, समय का क्या जाता है, बेशर्म! वही अपने रास्ते चला, वक्त बहुरूपिया है, हर पल, घड़ी, लम्हा युग, काल,  बदलता है, फिर भी, रुका है किसी के लिए, किसी को लगे  चलता है! बदल रहे हैं आप, समय को, या समय आपको बदलता है? बात गहरी है, और टाईमपास भी, है आपके पास? टाईम?

दुआ है...आमीन!

यकीन है आप अब भी आप होंगे, अपनी मुश्किलों के माई-बाप होंगे! वैसे ही दिल के साफ होंगे, अपनी चाहतों के पास होंगे! ज़िन्दगी गुज़र रही होगी रोज़ाना, और आप हर लम्हा एहसास होंगे! दुनिया बदल रही है तेज़ी से, रोज़ाना आप नए आइनों के खरीदार होंगे! ज़मीं सरकती है पैरों के नीचे, अक्सर इतेमाद!यक़ीनन अपने क़दमों पर होंगे! अपनी ज़रूरतों के तो सब दिलदार हैं, आप अपनी हमदिली के तलबगार होंगे! इस्तेमाल की चीज़ बनी हर खसुसियात, उम्मीद है आप ख़ासियत के बेकार होंगे! सारे रिश्ते और यारी फ़क्त एक 'एप' बने हैं, दुआ है आपके तरक्की से थोड़े गैप होंगे! सारी कामयाबी फक्त कमाई बनी है, ज़ाहिर है आप ऐसी आदतों के गरीब होंगे!

रास्ते के कंकड़

फुर्सत के दिन, या दिन में फुर्सत नहीं, देखिये करवट लेती हैं हसरतें कहीं, दिल की हरकतों के क्या दाम कीजे शौक अच्छे हैं, काम मत कीजे! हम अपना सफर होँगे, अपने रास्तों का असर होँगे, मील का पत्थर नहीं बनना, काबिल हमसफ़र होँगे उनके देखने में कुछ ऐसा असर, तलाश करते हैं कहीं कोई कसर, उम्मीद को क्या समझाएं, नज़र-अंदाज़ हैं या अंदाज़-ए-नज़र ! खुद को खोना है, खुद को प्यार करना उम्मीद से आज़ाद हो, फिर यार करना आपने सपने चुने, और हम काबिल बनें? तस्वीर आपकी, रंग हम क्यों  बनें? अधूरे अल्फाज़ रास्ता भटकते हैं, कदम कब इनकी राह तकते हैं,, हो गए अजनबी अनगिनत लम्हे, अब हम आइना तकते हैं ! वक़्त चलता है, फिसलता है, टलता है, निकलता है मुश्किल हैं ऐसे लम्हे जब खुद का साथ मिलता है चलता है, मुड़ता है, मिलता है बदलता है आपके पैरों से ही रास्ता निकलता है.... ख़ामोशी रास्ता ढूंड लेगी, तुम साथ चलते रहना खुद तक पहुँच जाओ तो अपना सलाम कहना,

बिखरे गौहर!

बिखरे गौहर आराम थे फरमाते,  हाथ लगे सुराग, हैं अब नज़र आते   क्यों नापते हो रिश्तों कि लम्बाई क़त्ल तराश होना है, फिर क्यों तलाश हीरे कि तलब बेहतरीन है, तो क्या खाक इबादत पीरे कि मेरे होने में ही इश्क-ए-अज़ीज़ है  फिर क्यों आशुफ़्तगी है कसर ढूँढ कर कहते हो कि कोई कोताही खली है हमारा साथ मुकम्मल है, क्यों ये बात कल है जिन्दगी क्या सिर्फ लम्हों कि फसल है? हमारे साथ कि बेहतर ये आसानी है दुनिया गयी भाड़ में, आपकी हम से सारी परेशानी है  सोच लो हर पल एक लम्हा हो जायेगा गुजरा आँखों से मंजर हो जाएगा, जी लो आज को हर घडी, बीता, कौन जाने कब पिंजर हो जाएगा होंसला साथ हो भी तो, बिना यकीं क्या होगा,  नजर आसमान में सही  पैर जमीं पर होगा देख लो   बिखरे हुए रंग, तस्वीर फिर भी एक है उम्मीद आसमानों कि, इरादे पर भी नेक हैं नजरें चुरा कर नज़र आते हो ... अमां! क्यों अपने हुस्न से कतराते हो कातिल हो या खुद का शिकार,  नजरें बयां कर रही हैं कई अल्फाज़..  ये अंदाज़ है...