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तालाबंद अक्लमंद!!

मीलों थके पाँव अवाम चला है, बेशर्म भारत का नया नाम चला है! छोड़ दिया अपने हाल पर मरने, घर बैठ सुनते हैं सब काम चला है! शर्मसारः कितने आ गए मदद करने, बस किसी तरह से ये काम चला है! मर गए सड़कों पर कितने लोग, समझे? यूँ बीमारी से बचने का काम चला है! बदतरी का सलूक, दर दर भटकते से बस एक माफ़ी से उनका काम चला है! हुकम चला, लाठी ओ फरमान चला है इज़्ज़त से कहां कोई काम चला है? बिठा दिया बीच सड़क छिड़कने को दवा, और पाँच सितारा किसी का इंतज़ाम चला है? राम के कारनामे और किशन के प्रपंच, एकलव्य का अब भी काम तमाम चला है! कर दिया एलान घर बैठने का अचानक बेघर तभी से तले आसमान चला है! घर बैठे ताली मारते बड़े बेशर्म हैं आप, क़यामत इस मुल्क का अंजाम चला है!!

तालाबंद -रुकावट के लिए खेद ?

इंसान होने का नया दौर चला है, भीड़ है क्या और क्या शोर चला है? लाठी के साथ गाली है, ताली के साथ थाली है इतने शोर में कहां सवाली चला है? बंद हो गयीं सरकारी दफ़तर में सारी मुश्किलें,  सरकारी ज़मीर की सुना, नीलामी चला है! उड़ कर आ गयी बीमारी कोरोना,  अमीरों का नया इंतज़ाम चला है! मजदूर रहने के लायक नहीं रहा, मजबूर, काम से निकाले चला है? रईसों की दुनिया है अब ये इसलिए लिए हाथ खाली चला है! उनको बीमारी का डर है चार दीवारों में उनका घर है, बैठ गए हैं हाथ पर हाथ धरकर, टीवी पर सुनते हैं रामायण चला है! डाक्टरों के पास पूरे कपड़े नहीं हैं,  इक्कीसंवी सदी मेरा हिंदुस्तान चला है? कितने ऐश थे उन लोगों के, रोज कमा कर खाते थे, पेट काट कर अपना पैसे घर भिजाते थे, अच्छे दिन का मुखौटा था वो, समझे हैं अब, साथ बदहाली चला है! रास्ता लंबा था, उम्र छोटी थी, चर्बी कितनी और कितनी बोटी थी? पाँव लंबे नहीं थे पर चादर छोटी थी, मां बाप ही उसके सर की छत थी, वो चल रहे थे तो ये भी चला था, देर और दूर में खाली पेट चला था! आखिर...