सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

चुनाव लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अब क्या?

दर्द है बहुत पर अपना ही तो है, टूट गया है वो पर सपना ही तो है! कड़वाहट फैल गयी है हर ओर, लाज़मी उसका चखना ही तो है? अपना नही पराया लगता है अब, क्या गिला मुल्क अपना ही तो है? हाथ खड़े कर दें और बैठ जाएं? उम्मीद को कहीं रखना भी तो है? नफरत से भी इतनी मोहब्बत, कैसे? क्यों दिल किसी का दुखना भी तो है? और ये दौर भी गुज़र जाएगा एक दिन, अभी फ़ूल गुलशन के महकना भी तो है! समझ नहीं पाए हक़ीकत, ये इल्जाम, फंदा तैयार है बस लटकना ही तो है! उम्मीद के बनजारे हैं और कहाँ-कहाँ जाएंगे? उनकी गली एक दिन फिर भटकना भी तो है?

खेल पास फेल!

कौन हैं ये लोग, चौड़ी तेज़ रफ़्तार सड़कों के फुटपाथ पर, चैन की नींद सोए है? या ज़िंदगी के खोए हैं? देश-समाज की तरक्क़ी से बिछड़े हुए, इंसानियत की परछाई में अनदिखे? क्या इनका कोई आधार है? या इनकी कोई भी बात निराधार है? संसाधन कम नहीं है, कमीं है!! सवालों की, नीयत की, इरादों की, पूरे होते वादों की! आप में है? अपनी जी-तोड़ मेहनत के लाचार, कड़वे सच को सब्र से मीठा करने, सपने देख रहे हैं, मुँह ढक सपनी हक़ीकत को fake रहे हैं! वो सुबह कभी तो आएगी... चौकिदार कौन है ओ चौकीदारी किसकी? चुपचाप खड़ें है, जो मुँह ढके पड़े हैं? बोल नहीं सकते या आवाज़ नहीं है? मजबूरी है, क्या, मंजूरी है? आपकी? मच्छरदानी घर है! उनका? सोचिए! उनको क्या शहर है? फुटपाथ उनकी बस्ती, गली उनका हाइवे, कूड़ादान सुपरमार्केट! इनका देश क्या होगा? वही जो आपका है? और इनकी देशभक्ति? गुस्सा निगल जाना? #ThinkBeforeYouVote

#ThinkBeforeYouVote !!

सुबह सो रही है, जाग रही है या भाग रही है? रुकी है कहीं या अटक गई है, या अपने रास्ते भटक गई है? रोशनी की शुरुवात है या अंधेरों से निज़ात, या डिपेंड करता है क्या मजहब, क्या जात? सुबह बन रही है, या हमको बना रही है? शिकायत कोई? किसको सुना रही है? इंतज़ार करें? हाथ पर हाथ धरें? माथे जज़्बात करें? किससे क्या बात करें? सब राय हैं? हक़ीकत? नीयत? यक़ीन! यक़ीनन? डरे हुए हैं! शक़ से भरे हुए हैं! झूठ तमाम से तरे हुए हैं! फ़िर भी, चाहे कुछ, सुनिए, कहिए, गहिए, दिल में रहिए या ज़हन में! रोशनी, रोशनी है, अंधेरा अंधेरा! रोशनी भी भटकाती है! अंधेरा रास्ता भी दिखाता है! उनकी कोई धर्म-जात नहीं, उनको फ़ायदे-नुकसान की बात नहीं! आप तय करिये आप देख रहे हैं? या अपनी नज़र के ग़ुमराह? #ThinkBeforeYouVote