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पूजा अर्चना प्रार्थना!

अपने से लड़ाई में हारना नामुमकिन है, बस एक शर्त की साथ अपना देना होगा! और ये आसान काम नहीं है,  जो हिसाब दिख रहा है  वो दुनिया की वही(खाता) है! ऐसा नहीं करते  वैसा नहीं करते लड़की हो, अकेली हो, पर होना नहीं चाहिए, बेटी बनो, बहन, बीबी और मां, इसके अलावा और कुछ कहां? रिश्ते बनाने, मनाने, संभालने और झेलने,  यही तो आदर्श है, मर्दानगी का यही फलसफा,  यही विमर्श है! अपनी सोचना खुदगर्जी है, सावधान! पूछो सवाल इस सोच का कौन दर्जी है? आज़ाद वो  जिसकी सोच मर्ज़ी है!. और कोई लड़की  अपनी मर्जी हो  ये तो खतरा है, ऐसी आजादी पर पहरा चौतरफा है, बिच, चुड़ैल, डायन, त्रिया,  कलंकिनी, कुलक्षिणी,  और अगर शरीफ़ है तो "सिर्फ अपना सोचती है" ये दुनिया है! जिसमें लड़की अपनी जगह खोजती है! होशियार! अपने से जो लड़ाई है, वो इस दुनिया की बनाई है, वो सोच, वो आदत,  एहसास–ए–कमतरी, शक सारे,  गलत–सही में क्यों सारी नपाई है? सारी गुनाहगिरी, इस दुनिया की बनाई, बताई है! मत लड़िए, बस हर दिन, हर लम्हा अपना साथ दीजिए. (पितृसता, ग्लोबलाइजेशन और तंग सोच की दुनिया में अपनी ...

प्यार बीमार, चलो जाने दो!

तुम्हारी भी कुछ कमियां हैं, मेरी भी कुछ खामी है, मेरी मार मुझे पहचान न दो अपने प्यार के बीच ,  दो झापड़ न आने दो चलो जाने दो,  मैंनें मारा, मैंनें माना, मेरा प्यार भी, तुमने जाना, मैंनें माना मैं बदलूंगा, मेरी कोशिश जारी है, आज फिर हाथ फिसल गए, अपने प्यार के बीच ,  दो झापड़ न आने दो चलो जाने दो, मैंने धमकी दी, अंजाने में, मारा तुमको, आवेश में,  वो गुस्सा था मेरे भेष में, जानती तो हो अब मान जाओ, चलो साथ अपने मकान आओ अपने प्यार के बीच , दो झापड़ न आने दो चलो जाने दो,  क्यों दूसरे से बात की, (2झापड़) बदन की क्यों नुमाइश की? (स्लीवलैस?) (दो घूंसे) क्यों मेरे सिवा कोई जरूरी है? (दे लात) ये हाथ में क्या ग्लास है? क्यों और कोई प्यास है? क्यों कोई और आस है? मेरा प्यार तुमसे मांगता है, ये दो एक छोटी बात है! क्यों इस पर कोई सवाल है? क्या यही तुम्हारा प्यार है? और शिकायत ये क्यों मार है? अपने प्यार के बीच , दो झापड़ न आने दो चलो जाने दो, सुनो मेरी भी आह को, जो टूटा हूँ, इस चाह को, क्या तुम नहीं मुझे ज...

मेरा प्यार बेशु_मार!

प्यार इतना हद से ज्यादा  की हाथ उठ गया, वो रोई, मैं रोया मसला मिट गया! प्यार इतना हद से ज्यादा उसको मुस्कराते देख किसी और को हाथ उठ गया मैंने फिर खुद को भी मारा मैं ही बेचारा! प्यार इतना हद से ज्यादा वो मेरी है हमेशा रहेगी,  मेरी बात नहीं मानी तो  हाथ उठ गया मेरा प्यार मैं लाचार अब नहीं दोबारा! प्यार इतना हद से ज्यादा दिन-रात, चार पहर प्यार के लिए तुम थक गईं? मुझको नहीं गंवारा, इसलिए हाथ उठ गया, मेरा व्यवहार मेरा प्यार, हर बार लगातार! प्यार इतना हद से ज्यादा तुम ही मेरी सब कुछ मैं भी तुम्हारा दाता, हमारी पसंद एक है, तुमने सवाल पूछ डाला? फिर हाथ उठ गया, मेरी मर्ज़ी, मेरा प्यार, और कुछ भी ख़बरदार! प्यार इतना हद से ज्यादा मेरा सब कुछ तुम्हारा खुशी, दुख, डर, गुस्सा इसमें भी तुम्हारा हिस्सा था गुस्सा उस से, किसी पर, सो हाथ उठ गया मेरा गुस्सा, मेरा प्यार करो स्वीकार! प्यार इतना हद से ज्यादा थप्पड, घुंसा, बेल्ट, ड़ंडा, सुलगती आग,  उस पल जो आए हाथ नहीं तो फिर...