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देखते हैं, क्या?

जिसे देखते हैं,  वो भी देखता है, नज़र मिल रही है,  या बस एक इत्तफाक है, ये वो लम्हा है, जो खास है. और उसके पहले जो पल था, वो भी खास ही हुआ? नहीं तो ये मिलना इत्तफाक न हुआ? और नज़र में आ गए, उसके बाद?  वो भी खास ही हुआ न? नहीं तो वो लम्हा क्या बकवास हुआ? जिसके बाद कुछ न खास हुआ? नज़रिए की बात है,  सच एक लम्हा भी अगर जिंदगी का खास है, तो ताउम्र जिंदगी खास है देख सकें तो देखें, सच तमाम है इर्द–गिर्द, जो आप चुनेंगे, वो ही आपका खास है!!

कुछ तो बात होगी!

आवाज़ चीख बन जाये, उम्मीद भीख बन जाये  ऐसी जिंदगी से लड़ना क्या, जो लम्हों की टीस बन जाये सपने हैं अरमान नहीं, ऐसे सफर आसान नहीं सच्चाइयाँ रस्ते में है इस से हम अनजान नहीं!   पुरे कभी हो जाएँ , ऐसे कोई काम नहीं फुर्सत में सोचेंगे, अब ऐसे आराम नहीं ! उस मोड पर नहीं की रास्ते बुन लें चले हैं जिस पर उसी को गुन लें अपने ही चेहरे को पीठ दिखाते हैं  कभी कभी यूँ भी हम सामने आते हैं आसमान भी यकीन है, जमीं भी यकीं रास्ता ढूंढते हैं जो मिला दे कहीं   कुछ ती बात होगी नजर नहीं आती आँखों से मेरे दीवारें नहीं जातीं क्यूँ  हर ओर अंधेरा नज़र आता है, आँखों में ना-उम्मीदी का असर आता है!

यूँ कुछ पहचान बनती हैं !

मुग्धा जिसे रंग अकेले अच्छे नहीं लगते घर दीवारों से नहीं, कहानियों से बनता है  जरा देखिये आप को कौन सा रंग जमता है  हर जज़बात कहाँ शब्दों में बयां होते हैं, कुछ अरमान रंगों में जवां होते हैं, हर सच्चाई नज़रों से नज़र नहीं आती, वक्त के दीवारों पर निशाँ होते हैं   इमरोज़, जो ख्वाब देखती नहीं बनाती है  अनजाने मोड़ों पर सफर करते हैं, अपने ख्वाबों को घर करते हैं, एहसास तारुफ बने रहें, क्या हुआ जो दुनिया को गज़ब करते है जावेद भाई जो रिलीफ वर्क के लिए हेयती मै हैं कितनी जमीनो पर आपकी सुबह होती है चलते क़दमों से दिल में जगह होती है आपके सफर आपको मुबारक हों एक जिंदगी कायनात को नज़र होती है ! नजर उठ कर कहाँ तक पहुंचेगी, उम्मीद अब कौन से अरमानो को सीचेंगी, अपने एहसासों से जुड़े रहिये, पुकार आपको कशिश बन कर खींचेगी.. और सौम्या जो दोस्तों की गिनती करती है उम्र की नहीं ... चलो जिन्दगी कि गणित बदल दें, उम्र प्यार कि हो, (जितनी बढे उतना अच्छा), दिन कि जगह दूरियों का सोचें, (जल्दी गुजर गया तो अच्छा) महीने मुलाकातों से बदलें, और साल लोगों ...

खुदगर्ज़ मन की दुआ!

गर्मी में बारिश की झलक,  नेक इरादॊं के फलक खुदगर्ज़ मन की दुआ,  कुछ देर तलक,  कुछ देर तलक और चंद  लम्हों तलक, झपक न जाये पलक बिरली सच्चाई है देर उतरेगी हलक  खुदगर्ज़ मन की दुआ,  कुछ देर तलक, कुछ देर तलक   सुन के बादल कि गरज, जाग उठती है ललक  कौन जाने असर दुआ का है,  या मर्ज़ी ए मलक खुदगर्ज़ मन की दुआ,  कुछ देर तलक, कुछ देर तलक  हम अकेले नहीं, कहती है पंछी की चहक सर हलाती हैं जमीं,  भेज मट्टी कि महक खुदगर्ज़ मन की दुआ,  कुछ देर तलक, कुछ देर तलक  कान में बारिश की टिपक, पत्तों पे बुंदों की चमक, हर सांस इशारे से, कहती है ज़रा और बहक खुदगर्ज़ मन की दुआ,  कुछ देर तलक, कुछ देर तलक