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गौ-बंधन

आज सारे बछड़े इंतज़ार में हैं, और बछड़ियाँ भी,  गौ माता के दु-पउआँ बेटा-बेटी रक्षाबंधन मनाने आएंगे। मुग़ालता है के अच्छे दिन आएंगे। कब तक प्लास्टिक चाट मुँह मीठा कराएंगे? कब तक गले में पट्टा बंधवाएँगे, कब कलाई में राखी बांधेंगे बंधवाएँगे? वादों से कब मुकरना बंद होगा? कब तक उनके नाम वोटों का धंद होगा? कोई तो भाई जो अक्लमंद होगा? मेरे और मेरी माँ के नाम कब कत्ले-आम बंद होगा? कब प्लास्टिक रीसाइकिलिंग मेरा काम नहीं होगा ? कब में सड़कछांप मवाली नहीं रहूँगी? गोबर और मूत्र से पैसा कमाते हैं? माँ कचरा चर रही है,क्या नहीं जानते हैं? ऐसे भाई-बाप-बेटे किस काम के?

मजबूर नफ़रत

अपनी जंग के सब मजबूर हैं, सच्चाई के कौन जी-हुज़ूर हैं? गुस्से में इतने के खुद से दूर हैं, कैसी मुल्कीयत के पाकिस्तान ज़रूर है? आवाज़ अलग है तो उसको जला देंगे, कौन इंसान जिसको खून जरूर है? नफ़रत के कितने सब मंज़ूर हैं, क्या कीजे के आदमखोर हुज़ूर हैं! सच छुप जाए यूँ के हम मग़रूर हैं, डरी हुई आवाम को छप्पन जरूर है! इंसान ही इंसान को काफ़ी पड़ेगा, कौन कहता है क़यामत जरूर है? लाज़िम है के खामोशी एक राय है, कुछ तो इशारा हो के नामंजूर है? दूध का रंग सुर्ख नज़र आता है, क्यों रगों में आज इतना सुरूर है? मूरख गिन रहे हैं अपने और उनके, आख़िरकार इंसान को इंसान जरूर है!

गाय - बायोडेटा

नाम - गाय पेशा - दूध धर्म - हिंदू जात - ऊँची, बड़ी, दबंग पद - सरकार परिवार - संघ   भाई - बजरंग बाप - बीजेपी माँ - वी एच पी दोस्त - राम सेना पता (घर का) - कचरे का ढेर, कोई भी सड़क, पता (ऑफ़िस) - नोर्थ ब्लॉक, केन्द्रिय सचिवालय दिल्ली नियमित पता (परमानेंट) - हेड़गेवार भवन, महल मार्ग, नागपुर भाषा - समझने वाली - ड़ंडा, घुँसा, लात, लाठी,प्यार का हाथ, गाली   भाषा - बोलने वाली - मेंएंएंएंएंएं   खाना - नॉन वेज फ़ेवरेट डिश - दलित, मुस्लिम की पीठ, इज़्ज़त, लाश