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रास्ते खोज़ के!

उंचे उठिए , विशाल रचनाकार और दुनिया आप के साथ कम होइये और सब और थोडे कम हो जायेंगे उभरिए , विशाल रचनाकार अपनी बेशकीमती को गले लगाइए थोड़ा और कमर कसिए और कायनात भी उभर जाएगी ठहरिए , विशाल रचनाकार आपकी ताकत आपके अंदर है , अपनी संभावना से न डरें , डरावनी सरहद को लांघ लें हिम्मत से आगे बढें , विशाल रचनाकार आगे महानता है , दिलदार होइए और आपकी रूह गुनगुनाएगी सच रहिए , गज़ब महारथी रास्ते कभी खत्म नहीं होते अपनी मुस्कराहट से बल लीजिए नए मोड़ों से गुजरते वक्त साथी हो जाइए , सब महारथी , साथ में तेज है , ताकत है , एक दूसरे का आसमान बनिए ये साथ सब को बुलंद करेगा क्यों कम होते हैं , प्रिय महारथी अपने बचपन को गौरवान्वित करिए , अपने सच को पालिए , जी लीजिए , निडर , निर्भीक बनिए , शोर करिए ! - एक इंग्लिश रचना से अनुवादित जिसके कवि का नाम ज्ञात नहीं!

गुरुज्ञान!

जो सीखा है वही सर चढ चीखा है, आजकल हर और शोर बहुत है!  हर और उस्ताद हैं, सब के सब आबाद हैं, फ़सल बनती है भेड़ों की, तालीम लाजवाब है! हाल सिखाते हैं, हालात सिखाते हैं, बात सिखाते हैं, दे लात सिखाते हैं, जात सिखाते हैं जज़्बात सिखाते हैं, कौन कहता है कि आप 'सिखाते' हैं? गुरु गोविंद दोऊ खड़े, मांगे अपनी फ़ीस,  ये ही दुनिया है चेले, सीख सके तो सीख! जात का पाठ पढा गुरू बनते हैं - हाथी के दिखते दाँत एक वो हैं जो घुंघरू  बनते हैं - हर कदम साथ उस्ताद! कहत कहत किस जात के, जड़मत हुए सुजान, बेशर्म 'उँची जात' कहें, न ज़ूँ रेंगे इन कान!   गुरु हुए तो क्या हुए जैसे पेड़ खजूर, तोता बन गये कई तो कोई बने लंगूर!  पैदा हुए से सीखें हैं, पढे गये तो सब भूल, एक गाँठ बाँध लाये सो, ड़ंड़ा पड़े सब कबूल