राम नाम के काम सब, राम नाम के लच्छन, इज्ज़त से सब खेल रहे राम जपन के बंदर, राम जपन के बंदर सारे बने दुषासन, लाल किले पर चढ़के ये देते भाषण, भाषण के बड़े बीर लगाबें झूठे नारे, संविधान पर बैठ जोर से राम जपारे, जप के ज़ोर से राम राम मस्ज़िद दिए गिराये, नफ़रत के सौदागर अब देस अपना चलायें, देस अपना चलायें राम के सारे जादे, बेच दिए पूरी देसवासी अक्ल के आधे, अक्ल के आधे राम को सारे अंधे, मज़हब के चल रहे तमाम धंधे अंधे, धंधे-अंधे चला रहे माया का जादू, चला रहे सत्ता अंबानी-अडानी के बाबू अंबडानी के बाबू सब देस को सेब बनायें, बेचेंगे ये मुलक कोई जो जेब गरमाए, गरम जेब के लालच में देसभगत सब आये लालच की भक्ती में सारे राम-लुभाये! रामलुभाये आसा, देव, और श्री के संकर, फूल चढ़ाये बहुत कोई अब फैंको कंकर!
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।