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भक्ति से मुक्ति

तोड़ तोड़ के मस्जिद को मंदिर दिए बनाए, कत्ल कर "अल्लाह" का राम बड़ा बनाए! मस्जिद पर मंदिर बने, मंदिर पर सरकार, संविधान की कब्र खोद रहे, लोग लाख़–हजार! लोग लाख–हजार सर घुटने कर बन गए हैं भेड़, में–में मिमियाते, समझते खुद को भक्ति के वीर मस्जिद में दिखते नहीं, सिर्फ मंदिर में मिलते हैं, ऐसे भगवान तो फकत अज्ञानता में पलते हैं! पहले मंदिर टूटा था इसलिए अब मस्जिद तोड़ेंगे, रैट–रेस में हम सबसे अव्वल आ कर छोड़ेंगे! पंजा हो झाड़ू या कमल, जो मंदिर ईंट लगाए, कौमी राजनीति में फसल काट वो खाए! फसल काट वो खाए, सौ कतल भी माफ़, शैतान गद्दी बैठे, बेईमान को मिले इंसाफ!

दो बच्चे साफ़!

दो बच्चे, बुरे या अच्छे? झूठे या सच्चे? आपके या अनाप के? जात के या "छी! दूर हट" क्या उनका गुनाह हुआ? क्यों हिंदू थे? या "वो वाले हिंदू?" वही यार! समंझ जाओ! जिनका कोई कुछ नहीं कर सकता! हां हां! वही अछु...  नहीं नहीं दलित!  हा हा हा हा हा हा !!! इनका कुछ नहीं हो सकता,  ये सुधरेंगे!! (भारत माता की जय सच पर स्वच्छ की विजय) हां!! तो क्या हुआ, दो से कौनसे कम हो जाएंगे, नाली के कीड़े! अरे, उफ ये बदबू,  पोट्टी कर दी क्या  ये तुम्हारा लाड़ला, करा कर नहीं निकलीं थीं! उफ! जरा गाड़ी रोको (चीईईईईईईईईई!) चलो बदलो इसका डाइपर, (2 मिनिट) हो गया, चलो अरे! ये डाइपर फेंको यहाँ, नहीं है डस्टबिन तो क्या करें! फेंको इधर ही सड़क पर, ड्राइवर चलो! ज़रा ब्लोअर चलाओ, बदबू भर गई! हां ! मैं क्या कह रहा था?