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मनमंदिर!

उम्मीद छोड़ दी पूरी , आज़ाद हो गए! थोड़े थे आज पूरे ही बरबाद हो गए!! गिले - शिकवे सारे बेआवाज़ हो गए! नफ़रत के खिलाड़ी नाबाद हो गए !! अपने से ही अब सारी शिकायतें हैं! अपने इरादों के दगाबाज़ हो गए !! दिल रखना है बस अपना किसी सूरत! गुम अपने से ही सब सरोकार हो गए !! सराब जितने थे आज़ खराब हो गए! कसर नहीं बची हम पूरे मक्कार हो गए! ! मुगालते नहीं कुछ , पूरे तैयार हो गए ! अपने से किए वादों के बेकार हो गए !! तमाम यकीन थे सब फ़रेब निकले! अपनी समझ के हम नाकार हो गए! ! अब क्या खुद को आईने दिखाएं!   अपने अक्स खुद् को नागवार हो गए !! उम्र से कोई शिकायत कभी न थी! आज और थोड़े हम तैयार हो गए !! जश्न के शोर हैं अपनी ही गलियों में! एक और सफ़र के आसार हो गए !! नश्तर जो भी थे सब सवाल हो गए ! जख्म तमाम अब लाइलाज़ हो गए !!

जय श्री राम!

घर में सबको भगवान चाहिए, मंदिर का रास्ता आसान चाहिए, पैसे से मिलते है दर्शन, फिर किसको लंबी लाइन चाहिए! लोग मक्खी की तरह फिरते हैं, पहले घर को सामान चाहिए, कौन तपस्या करे, और तीर्थ पैदल करे, जन्नत के लिए अब विमान चाहिए! सीधी ऊँगली से नहीं मिलता, तरीका सबको शैतान चाहिए। कोई और करे तो बुरी बात है, किसको अपनी तरफ ध्यान चाहिए! टीवी सीरियल बन रही है ज़िन्दगी, सुनने को दिल की बातें 2 एक्सट्रा कान चाहिए, हर गली में मंदिर, हर पूजा पंडाल, जहाँ मर्जी कचरा, हर दीवार मूत्रपीकपान, बस उतना आसान भगवान चाहिए! किसने देखा है कितनी मुश्किल आसान? हो रहा है बस इतना सबको भान चाहिए! जो समझ सकते हैं सच्चाई वो बच्चे हैं, उनके दिमाग में सेंध लगानी है, अब तक मान्यता की बातें होती थीं, अब भगवान को विज्ञान चाहिए!! भगवान की क्या औकात हाथी को श्रीगणेश करें, प्लास्टिक सर्जन कोई उस टाईम चाहिए! प्रभु की क्या जुर्रत की जमीन आसमान करें, इंजीनियर का बनाया पुष्पक विमान चाहिए! कुछ नया नहीं है दुनिया में, हमेशा होता आया है, अंधभक्ति को मूरख इंसान चाहिए! जय श्री राम......देव, आसा, रवि...

राम के नाम के काम

मर्दानगी की दवा, नयी है हवा, प्रवीण है गवाह और उनका यकीं हिंदुओं में मर्दों की कमी, 500 रुपये में मर्द बनिए, माँ बहन की इज्ज़त का बजरंगी सरदर्द? अरे कड़वे सच सुन तबियत ख़राब हो गयी, चलिए हर मर्द....क्षमा कीजिए, हर मर्ज़ की दवा है, पतन_अंजलि, रामबाण इलाज़, सोचिये ! अब आपको राम भजने की जरुरत नहीं, अब राम खुद आपके पास हैं! कण कण में, साबुन शैम्पू में, आटा दाल, मैगी का भी रामकरण हो गया, बच्चे अब राम की शरण, बल्कि सारे जीव ही, कॉकरोच को भी मोक्ष है, दाने दाने पर खिलाने वाले का नाम, कपड़े कपडे पर राम पतन अंजलि कई दाग साफ़, कैसी ये हाथ की सफाई, सब योग का प्रकोप है, आपकी हर सांस में अनुलोम विलोम अब राम हैं, बिक रहे हैं या बेच रहे हैं? कौन है जो मतलबी रोटी सेंक रहे हैं? भुलाने का नहीं कोई काम, टीवी या अख़बार, इश्तेहार, इश्तेहार, चुकाना है आपको, बाबा के सन्यास का दाम, आम के आम गुठली के दाम, अब वो ही, राम के नाम आपको सरकार भी बेचेंगे, उल्लू बना आपके वोट खींचेंगे! बल्कि ये कहिये खींच लिया, कहिये रामराज्य का धंधा कैसा लगा?

गाय, अखलाक और हम!

गाय!(या बकरी) गाय हिन्दू बकरा मुसलमान, और देश में गधे पहलवान! गाय ने इंसान को मारा, गाय फ़रार बकरा गिरफ्तार! मुबारक हो गाय बकरी निकली, और भेड़चाल भीड़ भेड़िया ! किस गाय पर इलज़ाम लगे, किस इंसान को मासूम कहें! बकरी गाय हो गयी, अख़लाक़ तबाह!    हाथ की सफाई ऐसे, बकरी बनी गाय कैसे!? अखलाक (नैतिकता) अख़लाक़ को कुर्बान कर दिया, अपनी परम्परा का बड़ा नाम ? अख़लाक़ माने फ़लसफ़ा, तरीका, सोच अब आपका हमारा भारत है एक खोज! हमारा अख़लाक़ कहीं खो गया, और ज़मीर गहरी नींद सो गया! अख़लाक़ का खून पानी निकला, वहशियत की निशानी निकला ! एक अख़लाक़ का खून हुआ, एक अख़लाक़ जुनून हुआ! अखलाक का खून मज़हबी ज़ुनून! हम क्या काम मासूमियत जो जान ले ले, आपसे ही आपका इंसान ले ले! क्या हम सिर्फ़ भीड़ हैं,  या हमारी कोई रीड़ है? अर्थी ले कर निकले मानवता कि, और सब कहते, 'राम नाम सत्य है' कुछ सोच कर भीड़ में शामिल हैं, कुछ कम या ज्यादा, पर कातिल हैं!

काम आसान

  काम फकीरी का ज़रा आसान चाहिए, क्यों दुआ मांगे के सुख सामान चाहिए! क्यों लाउडस्पीकर पर भजन इबादत है नेमत बरस रही है आपको कान चाहिए! लॉटरी वाले का नाम भगवान चाहिए, मन्नत पूरी होना ज़रा आसान चाहिए! क्यों शोर मंदिर मस्ज़िद गिरजे में इतना है, इतना बस काफी नहीं की हम इंसान हैं! बस एक फ़िक्र की दोनों हाथ में लड्डू हों, और हाथ फैला के कहते भगवान चाहिए? क्यों हर काम आसान चाहिये, कोशिशों में ज़रा जान चाहिए!   बुरे कामों को नाम भगवान चाहिये, बगल में दबी छुरी को राम चाहिये! सब अपनी अपनी नीयत के इंसान हैं, सबको अपने हिस्से के भगवान चाहिये! खुदा बँट गये हैं तमाम मज़हबों में, सबको अपने हिस्से के इंसान चाहिये!

मज़हब, इंसान और ...

राम का नाम , करने लगे काम तमाम , करते हैं खुदा का सौदा , और रंगीन शाम कौन कहता है अल्लाह के बंदे हैं ? दुनिया गटर है , और कीड़े गंदे हैं ! रख दिया आदमी का नाम ' आम ' एक के खून को बनाते है दूसरे का बाम... अपने मुल्क में इंसानों की फसल अच्छी है,  जब चाहे काट लो, छांट लो , बाँट लो, सप्लाई ज्यादा, डिमांड कम हो, तो कौडिओं के दाम लगते है, और फसल स्लम में हो तो पैदावार/यील्ड भी जबरदस्त, दो बीघा जमीं में बीस परिवार, इस से पहले की कोई सरकारी योजना की बीमारी लगे काट लो, छांट लो , बाँट लो, अब अल्ला मियां को थोडा और काम होगा, बन्दों तक कैसे पहुंचे, सजदा होते सरों को तो लाऊड- स्पीकर कान होगा, और वहां की आवाज़ वर्तमान की मुलाजिम है और जो अल्ला मियां से ज्यादा अपनी सोच पर यकीं रखते है दुनिया की चमक, रफ़्तार, और गरज़ अब सबकी अकीदत में सेंध लगा चुकी है सलाम अब सलामती हो गया है, वालेकुम किसी कोने में खो गया है!

गुठली के दाम!

राम का नाम, मासूमों की जान, सियासत तमाम, शरीफ़ों की ख़ामोशी,  समझदारों की तकरीर, ज़ाहिल तालीम, और तजुर्बों की ज़हालत, बेड़ा-गर्क है मियाँ और इरादों की वकालत? धोका खाने का उतना गम नहीं जो इस एहसास का, कि हम आदमी आम निकले! भगवान के नाम पर दे दो अपने वोट! सियासत में भिखारी तमाम निकले!! जितने थे सरपरस्त सब हराम निकले!  कोई नहीं जिसके मुंह 'हे राम' निकले !! सियासी दंगलो के अब नए सामान निकले!  कहीं राम निकले तो कहीं कुरान निकले!!  भक्तों ने तेरे तुझे ही गलत साबित किया!  छुरा भोंक कर देखा, कहाँ पर राम निकले!! जिसने खुदा का नाम बदला उसको मारा! हे भगवन, तेरे भक्त बड़े  शैतान निकले!!  जरुरत पड़ गयी तो दोस्ती का वास्ता! फिर मिलेंगे जब कोई काम निकले !! साथ है, तो हाथ तुमको, क्यों कर जरुरी है! कोई सौदा है आम, कि गुठली के दाम निकले? कोई नयी बात नहीं, तरह तरह के राम निकले! हर युग में सीता की बस यूँ ही जान निकले!! (मंदिर मस्जिद के प्रेमी व्यापारिओं से परेशां हो कर  बाबरी कांड और उसके बाद...