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ऑक्सीजन!

 .......(फूलती साँसे)  ........हाँफते हाँफते एम्बुलेंस....?  रिक्शा, ठेला....जो मिल जाए सो! अस्पताल इंतज़ार, लंबी लाइन कागजात ऑक्सीजन ऑक्सिजन ऑक्सीजन ........ (खामोशी) .........(कोई जवाब नहीं) ..........(अबकी बार, इंतज़ार) ऑक्सीजन ऑक्सिजन ऑक्सीजन सरकार कहाँ है?  ओह! चुनाव रैली!! , अरे "A" को ऑक्सीजन चाहिए (ट्विटर पर x) अच्छा में पूछता हूँ, (ट्विटर पर Y) Y (व्हाट्सअप ग्रुप में)  अरे! "A" को ऑक्सीजन चाहिए XYZ,  पूछो, बताओ, पता करो, (व्हाट्सएप, टिवटर, फेसबुक, इंस्टा) हां मिला! उसको बताओ, कनेक्ट कराओ,  वहां पहुंचाओ!! ऑक्सीजन ऑक्सिजन ऑक्सीजन हां मिल गया हां मिल गया हां मिल गया  हां मिल गया हां मिल गया.... 1. अब शायद बच जाए! 2. बच गए! 3. हस्पताल में बिस्तर नहीं है! 4. मिल गया, पर अब देर हो गयी! 5. अब ऑक्सीजन नहीं, क्रियाकर्म करवा दीजिए! ..... अब की बार, अंतिम संस्कार!!

क्या खेल खेलें कश्मीर के बच्चे?

आज बहुत मजबूर हूँ, कश्मीर से बहुत दूर हूँ, जैसे पेड़ खजूर हूँ, याद आ रहे हैं वो दिन, वो लोग जो इंसान थे, हमारी तरह, तुम्हारी तरह एक उम्दा मेज़बान की तरह, साथ हंसते थे, हम परेशान न हो, इसके लिए परेशां रहते थे, जब उनके साथ "खेल से मेल" किया, तो सब वैसे ही हँसे जोर जोर से, जैसे लोग बनारस में हँसे थे, या कंदमाल में, दिल्ली में, पुणे में, जुबा में, येंगॉन में पर उसके बाद जो बात हुई, तब उनके दर्द से मुलाक़ात हुई, "हमारा बचपन अँधेरे को बली था" अब हम अपने बच्चों को हंसाएंगे, वो हमारे शुक्रगुजार हुए, और हम, अपनी नज़रों में ज़रा कम गुनाहगार हुए, कश्मीर भारत को खूबसूरत है, और सारे देशभक्त, उसको कोठे पर बिठाना चाहते हैं, एक जगह है सबके लिए, जहां से डॉलर्स आते हैं, पाउंड, यूरो, और रूपये भी, कौन छोड़ता है ऐसे माल को, हर साल जो नयी हो जाती है, वर्जिन तैयार नथ उतरवाने को, कौन देखता हैं कि वहां इंसान हैं, उनके दिल हैं, उनकी जान है, उनके बच्चे हैं जो सरकार की गोली कुर्बान हैं! सफर ज़ारी था, आने जाने में, कश्मीरी दोस्त हमको लगे जगहों के बारे बताने...

दर्द है!

(दोस्त - कुछ ज़िंदगी को महसूस करने वाला सुनाओ? ) दर्द से दोस्ती नहीं करनी, और दुश्मनी होती नहीं हमसे, मासूम बन गए हैं ऐसे सब दर्द हमारे हिम्मत रखो मत कहिये, कुछ काम की नहीं, बस दो लम्हे आकर साथ मुस्करा दो मैं बीमार नहीं, बीमारी जबरन पास है, प्यास थकी जरूर है पर कम नहीं हुई! मैं आसान हूँ पर मुश्किल में पड़ी हूँ, मैंने सीखा ही नहीं यूँ बेबस होना! (दोस्त - दिमाग में घुस गये हो क्या?) आपने रास्ता दिया, ज़ज्बातों से वास्ता किया, थोडा बहुत हम सब ने एक दूजे को ज़िया है! दर्द आसान हैं गर कोई सुन ले, कम नहीं होते पर संभल जाते हैं! गुजर रहे थे यहीं कहीं एहसास आपके, मैं दुआ कर रहा था तो हाथ आ गए! हम कुछ भी नहीं और आप भी, न हमको ही खबर है, और न आप को कुछ पता दर्द कितना अकेला कर देते हैं, अपना ही साथ देते नहीं बनता! हम भी जोश हैं, मज़ा हैं, अंदाज़ हैं, साथ रहते हैं सब पर कोई नहीं गिनता तमाम नसीहतें मर्ज़ की और मिज़ाज़ के नखरे, किसी का भी साथ देते नहीं बनता ! (एक दोस्त जो केंसर का दरिया पार कर चुकी है, और उसके रेड़ियोधर्मी इलाज़ के साईड़-एफ़ेक्ट्स से अक्सर किसी दर्द से जूझती र...