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एन आर सी नहीं!

एक कागज के टुकड़े जितनी आपकी औकात है, कौन हैं जो कह रहे हैं "वाह वाह! क्या बात है"? समझ नहीं आता आखिर क्यों धर्म जात है, फिर फिर वही सवाल क्या धर्म क्या जात है? सिर्फ़ इंसान होना काफ़ी नहीं है ऐसी बात पर कानून की लात है! ऊपर से ये दावा के हम मुल्क चलाएंगे, संविधान चलाना जिनको घूंसा-लात है? क्यों लाज़मी है जो न वाज़िब न मुनासिब है? सिर्फ इसलिए के किसी के मन की बात है? गरेबाँ तक उनके हाथ जबरन आते हैं, जिनके मुँह पर भारत माता की बात है? क्यों वो एक एक को चुन चुन के जांचेंगे, आस्तीन के सांप हैं जिनके ये जज़्बात हैं! हुक़ूमत की लाठी अपने सर भारी है, कश्मीर पर फिर क्यों अलग जज़्बात हैं??

टिटहरियां!

वक्त के धागे से, याद की सुइयों में दर्द को सीते हैं ! गुजरे हुए मौसम की, सुखी बरसातों को अश्कों से भिगोते हैं! यादों की पतझड़ के, टूटे हुए पत्तों से छुपते छिपाते हैं!  जिस्मानी रातों की, रूहानी बातों के लम्हे जुटाते हैं! चुभ न जाए कहीं, बंद हुई पलकों में सपनों को सुलाते हैं! अधखुली क़िताबों में, गुम हुए शब्दों के मतलब तलाशते हैं! तन्हाई के शोर सुन, खामोशियों की भीड़ में, ख़ुद को गुनगुनाते हैं! तस्वीरें तमाम देख, अपनी पहचान को अजनबी बनाते हैं! अपने साथ देर से, इत्तला के फेर में, दूर सब से जाते हैं! यकीन सारे तय हैं, उसके ही सब भय हैं, ख़ुद की ही सब शय हैं!

नाम - लड़की

नाम - लड़की जगह - कश्मीर  उम्र - कोई ठिकाना नहीं देश - घर के बाहर खड़े AK-47 (या वैसा ही कुछ) आर्मी वालों से पूछ कर बताउं?  जन्म दिवस - रोज़! अगर जिंदा बच गए तो तालीम - झुठी, गुमराह करने वाली (स्कूल की)      -----  144, कर्फ्यू, तलाशी, ताकत, बेइज्जती,  शौक - इज्ज़त, आज़ादी, आईने से आँख मिलाना घर में कौन कौन है - है या था? मौज़ूद या मिसिंग?  दोस्त - ज़िंदा या मुर्दा? स्कूल में या अस्पताल में? कोई सपना - 'दिन का?' - रात में चैन की नींद                    'रात का?' - "कश्मीर" आप किस बात से मुतासिर हैं, प्रेरित हैं?  -  कश्मीरियत पाँच साल बाद आप अपने आप को  ? पाँच साल? पहले दे दीजिए, पाँच साल? एक दिन ही दे दीजिए?