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ससुरे सच!

दुनिया में कहाँ से मुये मर्द हो गये, सरफ़िरे सारे सरदर्द हो गये  इतने कैसे बीच फ़र्क हो गये,  सर पड़े जिसके बेड़ागर्क हो गये  ये प्यार ससुरा कैसा जो दवाई न बने क्या काम का दूध कि मलाई न बने, वो थंड़ कैसी जो रज़ाई न बने उस्तरा (इस तरह) कोई कसाई न बने! ये साथ कैसा ससुरा जो सवाली न बने, क्या काम की मुर्गी जो हलाली न बने, वो बोसा ही क्या जो लाली न बने, रोशन उम्मीदें हैं, बस दीवाली न बने  हम कहीं अचार बन रहे हैं, वो कहीं लाचार, यही आज की ताज़ा खबर, यही टुटता समचार हमारी खिचड़ी बन रही है, और वो मिर्ची बने हैं क्या बतायें हाल, हालात साले बावर्ची बने हैं!  बन संवर के बोलेंगे तो झुठी बात होगी, लड़ झगड़ कर बोलेंगे, तो खोटी बात होगी, रोज की बात कहें तो रोटी- भात होगी, बस मुस्करा दीजिये मोटी बात होगी! नोंक -झोंक आपसे हुई, सो चाट होगी रुठ गये तो मन्नतों की लगी, हाट होगी आ गया गुस्सा, तो खड़ी खाट होगी, मान गये अपनी, तो बड़ी थाट होगी!