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श्रदांजलि लोकतंत्र!

हद है, बेहद है, बद से बदतर है! पैर बेसिर है, कलम सर है, तलवे चटे हुए, जहन बंटे हुए, चाल भेड़ है, भक्ति भेष है, खाल हिरन, चाल भेड़िया कार सर है, न्यूज़ टर्र टर्र है कुआँ खाई भाई भाई नगरी अंधेर, उल्लू सीधा घड़े चिकने, तूती नक्कार, डूबते तिनके, ढाक के तीन, तीन तेरह कोरा काम न टस न मस बेईमान मेहमान मान न मान, छूरी मुँह में, राम बगल, मौत बिगुल, धान बाईस पसेरी! माथा ठनका?