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गाय - बायोडेटा

नाम - गाय पेशा - दूध धर्म - हिंदू जात - ऊँची, बड़ी, दबंग पद - सरकार परिवार - संघ   भाई - बजरंग बाप - बीजेपी माँ - वी एच पी दोस्त - राम सेना पता (घर का) - कचरे का ढेर, कोई भी सड़क, पता (ऑफ़िस) - नोर्थ ब्लॉक, केन्द्रिय सचिवालय दिल्ली नियमित पता (परमानेंट) - हेड़गेवार भवन, महल मार्ग, नागपुर भाषा - समझने वाली - ड़ंडा, घुँसा, लात, लाठी,प्यार का हाथ, गाली   भाषा - बोलने वाली - मेंएंएंएंएंएं   खाना - नॉन वेज फ़ेवरेट डिश - दलित, मुस्लिम की पीठ, इज़्ज़त, लाश

कचरा पुराण!

समझ में नहीं आया देखा तमाम कचरा ढेर, अंबार इंसान की लीला अपरमपार मुरख थोड़े, पहले उबकाई, फ़िर बात समझ में आयी सही-गलत, अच्छा-बुरा, छोटा-बड़ा, सफ़ेद-काला जैसे ही, गंदगी-कचरा भी सम्पूरक हैं, दीवाली है, घर की सफ़ाई लाजमी है, पर लॉ ऑफ़ कंसरवेशन ऑफ़ कचड़ा, जो मशहूर वैज्ञानिक, “पोंगा पंड़ित" की देन है, के अनुसार, कचरा खत्म नहीं कर सकते, उसकी केवल जगह बदल सकते हैं, तो लो घर साफ़, गली, मोहल्ला, शहर, गंदा बदबूदार और इरादा देखिए कितना नेक है ओह! लक्ष्मी आप! बाहर बदबू है न बहुत,  हैं हैं हैं (खीसें निपोर) आइये न, हमारे घर के दरवाज़े हमेशा खुले हैं, कुछ इंसान कितने दूध के धुले हैं मूरख में, अब समझा ये, वर्ण-व्य्वस्था का विज्ञान, छूआ-छूत का नया आयाम मन को साफ़ रखने के लिये अपने इरादों की बदबू विचारों की गंदगी, दिमाग की कीचड़, सेहत के लिये अच्छी नहीं, इसे एक वर्ण -समुदाय संभाले सब की भलाई के लिये कुछ को तो अछूता रहना ही पड़ेगा, यही विधि-विधान है, शास्त्रों का ज्ञान है गंदगी सोचने-फ़ैलाने वाला = साफ़ होगा, शाश्वत, ब्राह्मण सफ़ाई करने वाला - ...

सब चलता है!

कहते हैं , चलता है , सब कचरे का ढेर ४ दिन का , अब तक नहीं हिला ,   सड़्कों पर हजारों रहते हैं , उनका सिक्का अभी तक नहीं चला , पानी , नाली का जो रोज़ अटका है , और चलता है प्लास्टिक जिसकी जनसंख्या से हमारी कॉम्पटीशन चलती है , भगवान , हो गयी है हर जगह मिलती है ? मुर्ती उसकी , और  चढ़ावा  बाहर मंदिर के , लाल , पीले , हरे , गुलाबी रंग की पन्नियों में सर्वव्यापी है , और दिन वो दूर नहीं जब होगा सर्वशक्तिमान , क्या समझ के चलता है वो लड़का , किसी भी लड़की के पीछे , और चलता है , पीछा करना , सीटी , छेड़ना और बाहें मरोड़ना , क्यों अगर कुछ रुकता है, तो वो है लड़की का घर से बाहर निकलना , अपने रस्ते चलना , जीना अपनी मर्ज़ी से , देश के सब काम होते हैं , चलता है , सिगनल तोड़ के चलना रुकती है तो बस ट्रेफ़िक में फ़ंसी एम्बुलेंस आखिर जिंदगी मौत हमारे हाथ नहीं , बाकी देशों को ये बात ज्ञात नहीं , नयी गाड़ी का एक नट ढीला चलता है , फ़ैक्ट्री में क्वालिटी चेक अब छोटी छोटी बातों में नुक्स अरे हम इं...