सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

propaganda लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"जंग?"

जंग में आसरा क्या है? भरोसा कहां है? अपनी ही हिम्मत के सहारे हैं,  उसी हिम्मत के बेचारे हैं! लाखों है दुनिया में ऐसे,  जो जंग के मारे हैं! जंग क्यों वही सारी जंग है, सोच जिनकी तंग है,  इंसान होना रंग है? भेद के सब भाव हैं,  झूठे सारे ताव हैं,  सदिओं के ये घाव हैं! संस्कॄति के दाव हैं,  नैतिकता - चारों खाने चित्त! ज़िंदगी जंग आवाजें इकट्ठी होती हैं,  जय भीम! हक की,  कुचले हुए सच,  जुल्म की लाखों परतें,  चीरते,  जमीं होते हैं! सीखते, आवाज़ उठा,  कंधे से कंधा मिलाते! जंग के हथियार खबरें बतानें को नहीं,  बनाने के लिए हैं,  जताने के लिए हैं,  बरगला कर झूठ से भीड़ जुटाने के लिए हैं, सच से ध्यान  बंटाने के लिए हैं! जंग के प्रपंच! एकता कमाल है,  अनेकता बदहाल है सब को एक साँचे में ढलना है,  भेड़ बन के चलना है  "मैं" "मैं" "मैं"  सब को लगता है "मेरी" आवाज़ है  हंसी-खुशी मन की बात मान रहे हैं  जो छ्न के आया  उसी को छान रहे हैं! आप नया क्या जान रहे हैं?

दुआ सलाम!

रास्ते में हम मुस्कराए तो वो सलाम करते हैं, आसानी से एक दूसरे को इंसान करते हैं! फेसबुक पर ज़रा बहस हुई कि इतने हैरान हो गए, आसानी से अपनों को शैतान करते हैं! टीवी पर कह दी दो मन लुभावन बातें जयहिंद बोल, ज़रा से मेकअप से उनको भगवान करते हैं! न्यूज़ में दे रहे है ख़बर, डर कर, ज़ेब भर कर, कितनी झूठी खबरों को विधान करते हैं? भक्ति में धर्म के ठेकेदार बन कर दलाल बैठे हैं, वो कहें तो आप मस्ज़िद शमशान करते हैं? लॉकडाउन हुआ घर बैठ सब राम-किशन गान करते हैं, गरीब मजदूर हथेली में जान करते हैं? कोरोना क्या इतना डरा दिया कि अब लाइन करते हैं? अछूत बने हैं और झूठी शान करते हैं? पी एम केयर नॉट राहत के काम को भी वो दुकान करते हैं? अनमोल झूठ के आप कितने दाम करते हैं?

सवाल करो_न!!

(कुछ तो सोच लें‌ साथिओं?) खोखली नीयत ढोंग रचेगी, तमाशबीन ताली बजाएंगे!! खो गई है सोचने की कला, भेड़ बन कर भीड़ जाएंगे! (सवाल जरुरी हैं तरक्की के लिए) भिड़ रहे हैं किसी भी सवाल से, जल्दी ही वो भगवान कहलाएंगे!! उनने किया है तो सोच के बहुत, हम काहे अपनी अक्ल लगाएंगे? (बस हां में हां, कुछ सोचा कहां?) श्री राम बोल कर घर जलाएंगे, घर बैठे बैठे थाली चमकाएंगे!! देशभक्ति है घर बैठ जाएंगे, दिहाड़ी वाले आज क्या खाएंगे? (बिना सोचे, बिना समझे निर्णय) काल करे सो आज कर, आज! आज भीड़, कल कर्फ्यू लगाएंगे? सामाजिक दूरी तो हो गई, सुनिए? समझ से दूरी कैसे मिटाएंगे? ( ठेके पर मजदूर, लाखों बेघर और झूठ) जिनका कोई नहीं उनको राम है, भूखे पेट भगवान को प्यारे हो जाएंगे!! थाली पीटने से खत्म वाइरस इस विज्ञान से नई सदी जाएंगे? (बस बड़ी और खोखली बातें) मदारी शातिर हैं इस मुल्क के,  डमरू भी अब जमूरे बजाएंगे!! न काम को जा सकें ने धाम को! युँ हालात से हमको निपटाएंगे? ..

मुर्दा जानशीन!

आग जल रही है लाखों सीनों में, गश्त की कैद में सूखे पसीनों से! मन चाहा देखने की इजाज़त नहीं है, 9 हफ्तों से शुक्र की इबादत नहीं है? मुश्किल सवालों की आदत नहीं है! हामी के बाज़ार में बगावत नहीं है! सवाल सारे कवायत हैं रियासत की रवायत हैं, फ़रमान ही भगवान है! ख़बरदार, ये जुर्रत,  क्या औकात! गले पर सरकारी हाथ! ट्विटर पर गाली, न्यूज़ सीरियल सवाली, भीड़ की हलाली, धर्मगुरु दलाली! व्हाट्सएप के खेत हैं डर के बीज नफ़रत के पेड़, मज़हबी भीड़, भेड़! कश्मीर सिर्फ जमीन, सुंदर बेहतरीन, 80 लाख कब्र, ज़िंदा,? करोड़ों जोशीले मुर्दा, जानशीन?

इतिहास्य

विकास का इतिहास है उसकी बुनियाद, अनगिनत इंसानों की लाश है दफनाए हुए, सच कहने को "काश" है नाम – सभ्यता पता – आधुनिकता उम्र – सदियाँ बीत गयीं इतिहास गुलाम है चंद हाथों में उसकी लगाम है जो बुनियाद बन गए उनकी प्राथमिकता(F.I.R.)दर्ज नहीं, जो कमज़ोर थे, उनकी बात आज़ न करें तो हर्ज नहीं तलवार सर कलम करती है समझदार को इशारा काफी सच्चाई हमेशा हुकूमत को सर करती है, आप को अपने इतिहास पर, परंपरा पर गर्व है जाहिर है आपकी जिंदगी पर्व है, आप को क्या इल्म है लालच, वहशियत, पागलपन, जुल्म, जब इतिहास के पन्नों पर चड़ते हैं तो समृद्धि, वीरता, दूरदर्शिता, न्याय कहलाते हैं, आपका दिल बहलाते हैं इतिहास गवाह है, कितनी भी परंपरा की वाह-वाह है, हम आज भी वही इंसान है लालच, जुल्म, वहशत, अब भी हमारी शान है, मुबारक हो ! भ्रष्ट समाज की सूचि में अपना ऊँचा स्थान है!