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आसान मुश्किल!

ये जो मेरे जमीन आसमान हैं, ये ही मेरे सपनों के सामान हैं! मुझे कहां पंख लगते हैं, उड़ने? वहीं हूं जहां मेरे अरमान हैं! वो ढूंढे जमीं जो आसमान हैं! पैर कहते हैं पुरानी पहचान है!! फिक्र कहां, कब कहां पहुंचेंगे? चल दिए, वही अपना अंजाम है! खोए हैं, अपनी ही तलाश में, कौन कहता है काम आसान है? बनावट, दिखावट, सजावट सब, महंगा सामान ओ सस्ती दुकान है! अक्स है वो, सब जो तराशते हैं! कब समझेंगे बदलता मकान है!

मोहब्बत के काम!

मोहब्बत क्यों ये मुश्किल काम है? पहलू में उनके सुकूँ, आराम है! क्यों दुनिया में आशिकी बदनाम है? उनकी शिकायत, ये जरूरी काम है! फिक्र है मेरी ये उनका काम है, ये समझ लेना सफर का नाम है! आपस में दोनों खासे बदनाम हैं, आ गया गुस्सा तो खासे आम है! सब शिकायत है मेरी ख़ामोशी से चुप हैं हम और खासे बदनाम हैं! नज़र जब भी नज़रिया बन जाए, समझ लीजे किसी का काम तमाम है! ज़िंदगी जी रही है ख़ूब दोनों को, हम हैं साकी और वो जाम है! मोहब्बत गहरी पहचान है, सुबह मेरी ओ उनकी शाम है! एक-दूजे को मुश्किल-ए-आसान हैं! चैन भी हैं ओ कभी चैन-ओ-हराम हैं!

रास्ता मुसाफ़िर!

मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है! आपके कदमॊं कि निशान हैं बस! मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है!! आप चलिए और वही आपका रास्ता है,  आगे बढिए और अपना रास्ता बनिए,  मुड कर देखिए और जानिए, आ पहुँचे, वो मोड़? फिर कभी उस पर न जाना हो, मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है समंदर में किसी नौका की टिमटिमाती रोशनी है! बस! - एंटोनियो मचाडो की मशहूर स्पेनिश कविता 

सवालिया एहसास

नज़रपरस्त है फिर भी यकीं नहीं जाता तारीख रह रह सर उठाती है ख्यालों में सेंध लगाती है वक़्त साथ साथ चलता है कितनी सादगी से छलता है खरीदने वाले को सिर्फ बाजार मिलता है हर चीज़ को दाम है यानि सब ठीक चलता है ! 'आह' को हालात मिले हैं 'वाह' कि आग बढ़ती है दायरे में खड़े हों तो सच्चाइयाँ सर चढती है कड़वाहट! क्यों चारों तरफ है? क्या इसका मुझ पर असर है? नज़रपरस्त है, नज़रंदाज़ हो उमीदों पर यकीं का ये लंबा सफर है  खूबसूरत दुनिया है तो नज़र नहीं आती क्यों!  असर इबादत है तो आह बन जाती क्यों!  मक़ाम जज़्ब है तो फिर सफर ही क्यों ?  सवाल ही मेरा सकूं हैं क्यों?

यूँ कुछ पहचान बनती हैं !

मुग्धा जिसे रंग अकेले अच्छे नहीं लगते घर दीवारों से नहीं, कहानियों से बनता है  जरा देखिये आप को कौन सा रंग जमता है  हर जज़बात कहाँ शब्दों में बयां होते हैं, कुछ अरमान रंगों में जवां होते हैं, हर सच्चाई नज़रों से नज़र नहीं आती, वक्त के दीवारों पर निशाँ होते हैं   इमरोज़, जो ख्वाब देखती नहीं बनाती है  अनजाने मोड़ों पर सफर करते हैं, अपने ख्वाबों को घर करते हैं, एहसास तारुफ बने रहें, क्या हुआ जो दुनिया को गज़ब करते है जावेद भाई जो रिलीफ वर्क के लिए हेयती मै हैं कितनी जमीनो पर आपकी सुबह होती है चलते क़दमों से दिल में जगह होती है आपके सफर आपको मुबारक हों एक जिंदगी कायनात को नज़र होती है ! नजर उठ कर कहाँ तक पहुंचेगी, उम्मीद अब कौन से अरमानो को सीचेंगी, अपने एहसासों से जुड़े रहिये, पुकार आपको कशिश बन कर खींचेगी.. और सौम्या जो दोस्तों की गिनती करती है उम्र की नहीं ... चलो जिन्दगी कि गणित बदल दें, उम्र प्यार कि हो, (जितनी बढे उतना अच्छा), दिन कि जगह दूरियों का सोचें, (जल्दी गुजर गया तो अच्छा) महीने मुलाकातों से बदलें, और साल लोगों ...