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अपनी बातें!

कह दिया सब कुछ और अब शिकायत, हम बात करते हैं तुम्हारी बातें नहीं रहतीं! साथ सोये थे कल रात और अब ये बात, तुम्हारे साथ हमारी राते भी रातें नहीं रहती! एक ही लड़ाई है दुनिया से, हम दोनो की, साथ हों वो तो लड़ाई, लड़ाई नहीं रहती! यूँ नहीं कि हमको कभी शिकायत नहीं कोई, वो पुछ लें तो शिकायत, शिकायत नहीं रहती! कुछ गलतियाँ हम अक्सर कई बार करते हैं, हमें आदत है और उनको आदत नहीं रहती! दुनिया कि नज़रों में दोनो ही काफ़िर हैं, कैसे कहे हमारे बीच इबादत नहीं रहती! खुदा नहीं कोई अपने, फ़िर भी फ़रिश्ते हैं मुश्किलें यूँ ही हमारी, आसां नहीं रहतीं!

एक शख़्स!

एक शख़्स हमारे खासे करीब है, हम से शिकायत के हमारे ग़रीब है! तमाशा है दुनिया का जिसको शरीफ़ हैं, एक शख़्स से पूछो तो खासे शरीर हैं! यकीन रखिये तो दुनिया अपनी ज़ागीर है, एक शख्स, हमको, फिर भी फ़क़ीर है!! दोनों को ही रास्तों में कितनी लकीर हैं, पैग़म्बर नहीं मालुम, एक शख्श पीर है! ये दुनिया साली चीज़ ही अजीबोगरीब है, दूर लगता है एक शख्स, इतना करीब है!! जो भी करना है, उम्दा सोच से करना है! एक शख्श को जोश-ए-ज़ज़्बा ही फरीज़ है! हमसे हमारी ही बातें करते रहिये, एक शख़्श अपने रिश्तों के नाज़िर हैं! हम से शिकायत ओ हम को आग़ाह भी, एक शख़्श शहंशाह ओ हमारे वज़ीर हैं!

स्वाति पुराण: शक संवत 2016 तिथि अप्रैल 24!

You think you know me? जो नहीं दिखते वो रंग भी समाये हैं, ज़िंदगी को हम यूँ नज़र आये हैं! (I am more then the colors u see) Get, not used to me रोज की हमारी आदत मत डालिये, हाँ, मुश्किलों में हम अक्सर काम आये हैं! (I am a friend, not a newspaper) Why does one always have to say something हमारी ख़ामोशी एक मोटी किताब है, स मझ लीजे आप किस पन्ने आये हैं?? (My silence has 100 meanings, CONTEXT, please!) Oh!hell  खुद को ही हम ज्यादा परेशां करते हैं, क्या मज़ाल जो कोई हमारे रास्ते आये है? (I suffer not from your but my own opinion) ...what were u thinking....man! प्यार किया है तो कान पकड़ खबर लेंगे, आपस की बातों में हम कहाँ शर्माए हैं? (Love is, what i expect from you, whats your game?) Not first, not in q, I am still standing हिसाब शौक नहीं फिर भी हिसाब है, हम कहाँ कभी गिनतियों में आये हैं? (I always suck at maths, and i am not in number game) What utter poisonous nonsense क्या देश, ये मज़हब ओ जात की बातें, इस कीचड़ में हम नहीं हाथ लगाए हैं! (O!my friend...

अपना जूता अपने सर!

अपने ही पैरों खड़े हैं, यूँ नहीं कि किसी से बड़े हैं! अदब है, यूँ नहीं कि आप बड़े हैं, नज़र आता है कि सीधे खड़े हैं! हमसे मत करिये रवायतों का जिक्र चाल चलन को हम चिकने घड़े हैं! कोई साथ ले कर नहीं जाता, गले शायद धूल बन कर पड़े हैं! सच यूँ भी हजम नहीं होता उपर से करेले नीमचढे हैं! एकतरफ़ा आईनों के जंगल में, सब अपने ही रस्तों के बड़े हैं! हमसे नहीं होती ईमारतें उँची, एक बूँद में भी समंदर बड़े हैं! वो सफ़र ही क्या जो खत्म है, इसी जिद्द पर आज भी अड़े हैं! जो पैर है वो ही जूता सर है, हम आदतों के खास बिगड़े हैं!