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दौर-ए-सियासत!

सरकार दीवार बन गयी है, व्यवस्था ज़ंजीर बनी है, जमूहरियत में कैसी ये, तानाशाह तस्वीर बनी है? गुलामी के दौर हैं, गुलामों की सियासत है, किसके मथ्थे जड़ें,  अज़ीब ये हालात हैं   ज़महूरियत तानाशाह बन गयी है, फ़ासिवाद की पनाह बन गयी है! डर सारे यकीन बन गये हैं, सच जिद्द बन गयी है ,सियासत की, ज़ुल्म है, जो बिन पूछे बगावत की! हर एक कत्ल जन्म देता है नफ़रत को,   ये कौन सी फ़सल की तैयारी है, कौन सी नस्ल की! रोज़ होते हैं, हर और हर हाल, गुनाह नहीं है तहज़ीब का सवाल! दुनिया गयी भाड़ में, तरक्की की आढ में, छाया काट रहे हैं, सब धूप के जुगाड़ में! सियासत साज़िश बन गयी है, फ़िरकापरस्ती नवाज़िश, इंकलाब की सिफ़ारिश है, खामोशी अब मुहलिक(Fatal) है!

अरे बैन- छोड़ !

शानदार भारतीय परंपरा,  "त्याग" ,  सीधी भाषा में बोलें तो "छोड़ना" राम ने राज त्यागा, राम राज हो गया,  वनवास करने के बाद दोबारा राज छोड़ने में कोई एक्साइटमेंट नहीं था,  टी.आर.पी भी  नहीं मिलती,  रियलटी शो का नया सीज़न था सीता त्याग दी,  मर्द बन गये, वाह, मर्दाना पुरुषोतम,  खैर वो पुरानी कहानी है,  "हे राम"  अब सरकार ने जनता को भगवान बनाने की ठानी है,  एकदम फ़्रेश कहानी है, फ़ुलटू टी आर पी वाली अरनब कि कसम, आप सब जानते हैं, त्याग से भगवान बनते हैं,  राम हुए, बुद्ध हुए,  वो राजाओं का युग था,  राजा भगवान हो गये अब प्रज़ा का युग है,  तो प्रज़ा बनेगी,  (ये एपिसॊड़ लम्बी चलेगी ) पर कैसे,  त्याग तो सिखाना होगा छोड़ना,  अब एक एक को कहां समझाने जायें,  चलो बैन का रास्ता अपनायें  बैन जोड़   मतलब बेजोड़ आईड़िया है,  और सदियों से कहावत चली आ रही है,  एन आईड़िया केन बदलो दि दुनिया बीफ़ बैन - छोड़     खाने का त्याग, अब मुसलमान भगवान होंगे मीट...