सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

slums लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

त्रिगुण

अनेकता में एकता है?  कौन इतनी फेंकता है?  ...नाम बताओ तो सब सरनेम पूछते हैं! सवर्ण कहाँ संविधान है?  लाखों पांव के छाले पूछते हैं? आप बूझते हैं? भारतीय  साथ दीजिए,  प्यार कीजिए, इज़हार कीजिए!  कहिए क्या सवाल हैं? भलेमानुस घर छोड़ कर आए हैं,  खाली हाथ घर वापस  ये देश के पराए हैं!  मजदूर  बढने की उमर है, पर किधर जाएं?  खाने, खेलने, सोने, बच्चे मालिक ने निकाल दिआ  सरकार ने टाल दिआ,  पुलिस की लाठी, गाली  ताली कोई परेशानी नहीं,  टीवी भगवान है,  बीबी पकवान है!  भक्त मर्द कितने हमदर्द हैं,  कितने साथ आए हैं,  कितने छुट गए, ओझल!

नैतिकता के बाज़ार!

इंसान उद्दण्ड हैं, झूठा सब घमंड है, दुनिया पर वर्चस्व का, नैतिकता, सभ्यता, घटिया मज़ाक हैं, बाज़ार का राज है, और सब बिक रहे हैं, मुंहमांगी कीमत मिले तो आप विजेता हैं, सही कीमत, आंखों पर पर्दा है, आप फिर भी सामान हैं! दर्द न हो  इसलिए मर्द हैं? तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, एक्सप्रेस हाइवे,  चमकीले साइनबोर्ड, गगनचुंबी इमारतें,  क्या दिखाते हैं,  लॉकडाउन में  क्या छुपाते हैं,  हैरतअंगेज बात,  लाखों सड़क पर  तब कहाँ जाते हैं? चलते नज़र आते हैं,  जब शहर चलता है! सब कुछ ख़त्म नहीं है, कितनों ने हाथ बढ़ाए हैं, कंधे मिलाए हैं, मजबूरी के दर्द, दर्द की मजबूरी आमने सामने हुए साथ आए हैं, हमदिली है, शुक्र है, सब का, गुज़ारिश एक, सवाल एक साथ रखिए, कल हमें ये सब, कहाँ नज़र आएंगे?