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गलत हिंद ई!

रम पराम पराम, उठे सबके कदाम, एजी ऐसे गीत जाया करो, अराम हेराम है, शराम बेशराम है, एक ही बज़ रंग हैं सब, और बड़े बदरंग हैं, दंग_आ नियत में रम गया है जैसे, सलाम का गला धड़ से कलम है, जयश्री रम गई है गटर की चकाचौंध में, कीचड़ नराम है सेज बनी सम विधान विषराम है,   अराम हेराम है, शराम बेशराम है, भग, वाह वाह हो रही चहुँ और, दंगआराम है,   समाचार व्यभिचार है, सच्चाई भक्त बनी है धूनी रामाए सारे दुष्कराम ही रम गए है कण कण, रम गए हैं, रम पराम पराम उठे सबके कदाम, योद्धा के सब धंधे हैं, बेसराम के बढ़े चंदे हैं डर से सब गंदे हैं, बदरंगी बंदे हैं! रम पराम पराम, उठे सबके कदाम, अजी ऐसे गीत जाया करो!

कायकू?

चलता है वही, जो चलता है, किसका क्या जाता है? बादल सच हुए, बरस बरस के, तरसे तर हो गए! सिसकते पहाड़, मिट्टी पत्थर सरकते, आएं किसके रास्ते? कितना ऊपर पहुंचे, तरक्की तमाम, नीचे गिरें धड़ाम! सभ्यता में जानवर, पालतू, आवारा, जंगल,जंगली नागवारा!! हाइवे लंबे लंबे, दूरियाँ कम करते, गांव के बीच से! रोडोडोन्द्रों (बुरांश) फूल, पैसा वसूल, जो जैसा जहां है! छुप रहे हैं सब? बादल, आसमाँ, पेड़! नज़र या नज़रिया? ठंडा गरम सूरज नरम तुम हम! लंबी चढ़ाई, घुटनों से लड़ाई, खुद पीठ थपथपाई!