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कुछ होना है!

"कुछ होना है" खेल है, दुनिया का! आप खिलौना हैं! सच तमाम है,  झूठ बोलते, उसके सामने आप बौना हैं! आप कम है, क्योंकि कोई ज्यादा है, खेल घिनौना है! कंधे किसी के सीढ़ी किसी को कामयाबी भी बोझ ढोना है! तराज़ू किस के, नाप किसका बाज़ार बड़ा है, आप नमूना हैं! रंग फीका है, ऊंचाई टीका है, वज़न ज्यादा कम मुश्किल होना है! "मैं" पहचान, पीड़ा, अभिमान, बड़ी तस्वीर, आप एक कोना हैं!

बातचीत की धुरी, फ़िरकी, चक्कर!

कितनी बातें की हैं  , कुछ दिल ने कुछ दिमाग ने तय की हैं  ,  कितनों तक पहुंची है कोइ बात सोचते सोचते हो गयी रात हो गयी फ़िर वही बात न रास्ते अलग हैं , न संघर्ष मैं जिस जगह पर हुँ , उसका क्या हर्ष पीछे मुड़ कर देखो  ; तो पीछे वाले लोग ही नज़र आयेंगे  ! निरीक्षण में अक्सर निष्कर्ष नज़र आयेंगे  ! निष्कर्ष है भुत का नांच निरीक्षण है सांच को आंच चेहरे के सामने कांच निष्कर्ष है दो और दो पांच तलवे में चुभी फ़ांस हलक में फ़ंसी हड्डी न खत्म होती कबड्डी  , चलो भावनाओं से जुड़ें सुनें , दिल बोलता है , हमेशा इशारा करता है , पर उस से कहां किसी का मन भरता है , हम अपनी सोच में अटके , लगते हैं हर अनुभव को , काटने - बांटने - छांटने उंच - नीच , अच्छा - बुरा , सही - गलत वो सब कुछ जो करे खुद से दुर  , क्या खबर , खुद को है क्या जरुर ? जरूर . . . क्या ?  हवा पानी और ज़रा सी नादानी  , थोड़ी अपनी और थोड़ी उनकी  , फ़िर क्यॊं किसी को इतना पुरा करते हो  , और ज़रा कदम चूका तो ...