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मैं प्रिविलेज!

  मैं धर्म और जात हूँ, सरकारी हालात हूँ, मेहनत का मज़ाक हूँ, मक्खन मलाई औकात हूँ! मुझे क्या फर्क पड़ेगा, तबरेज़ की रामहत्या से पायल के जातमत्या से मैं मिडिल क्लास हूँ!! मैं शहर हूँ, अपार्टमेंट घर हूँ, आरओ से तर हूँ, बस्ती से बेख़बर हूँ! स्लमबाई काम करती है, माफ़िया टैंकर पानी भरती है, मैं क्यों अपना हाथ लगाऊं, कचरा गीला सूखा बनाऊं? बस ट्रेन में ए.सी. हूँ, बाज़ार में निवेशी हूँ, मर्ज़ी जो परिवेशी हूँ, क्रेडिट कार्ड का ऐशी हूँ! मर्द मर्ज़ी मूत्र हूँ, पितृसत्ता पुर्त हूँ बाप, भाई, पति ताकत का सूत्र हूँ! जात में "नीच" नहीं, औकात में बीच हूँ, मर्द बीज हूँ त्योहार तीज हूँ! मैं हिंदी भाषी हूँ, मतलब खासमख़ासी हूँ, बहुमत की बदमाशी हूँ, जन्मसिद्ध देशवासी हूँ!

मौत की दुकानदारी

मौत ले लो मौत, जो ख़रीदे उसका भी भला, जो बेचे उसका भी भला, जो मरे उसको दफ़ना-जला! मौत सरकारी भी है और आतंकी भी, व्यापम भी है और उरी भी, भारत भी है और कश्मीरी भी, फांसी का फंदा है, किसी को धंद्या है! मौत एक बेनामी गाय है, ताकत के हाथों एक राय है! किसी के लिए खर्चा है, किसी के चाय की चर्चा है! किसी की मौत गुस्सा किसी की मौत जूनून किसी की मौत आतंक किसी की जूनून, कोई खुनी, कोई आतंकी कोई देशभक्त, किसी का मारना बहादुरी, किसी का कायरी, किसी को वीरगति, किसी को कुत्ते की किसी की मौत मज़हब किसी की जात किसी का बदला, किसी पर हमला...... ....... फिर भी हम इंसान हैं, जानवरो से अलग, कहने को बेहतर, लगे हर लम्हा इस धरती को करने में बदतर! तरक्की तहज़ीब मुबारक हो!

सरहदें

सरहदें,  मुल्क की, जात कि, औकात की,  बिना बात की,  पैरों की बेड़ियाँ,  चटखती एड़ियाँ,  सामने समाज की दीवार,  और अंदर यकीन लाचार,    किससे मिलें, क्या सोचें,  तौलें या तुलें,  मुस्करायें या हाथ मिलायें,  मैं अपने दायरों में फ़िर भी बंधा नहीं, उड़ने के लिये मुझे आसमाँ बहुत! कितनी दूरी रक्खें,  कितने नज़दीक आयें,  किसे अजनबी रहें, किससे पहचान बनायें,  गले मिलें! और कहीं‌ गले पड़ जायें? किस ज़ुल्म पे चीखें,  किसे हज़म कर जायें? मस्ज़िद टूटी तो "हे राम" मंदिर को हाथ लगाना हराम? कहाँ खीचें लक्ष्मण रेखायें? सामने घूंघट/ परदा कर के आयें, पर्दे पर आज़ादी,  "बेबी ड़ॉल" वो सोने की,  उसको क्यों कपड़ॅ पहनायें,  रात में ज़लदी घर पर आयें,  कहाँ कहाँ खींचें लक्ष्मण रेखायें? जात बतायें या जात छुपाएं,  सामने इंसान है या बम्मन ?  (माइंड़ मत कीजिये प्लीज़, बम्मन से मतलब है पूरा सवर्ण वर्ग, राजपूत, ठाकुर, २,३,४ वेदी, पाड़े, सक्सेना, माथुर, गुप्ता, कंसल, बैनर्जी, सिन्हा, नैयर, तिलक,...