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बुरी होली!

शैतान सोच की बोली है, "बुरा न मानो होली है"! मनुवादी बीमार बोली है, "बुरा न मानो होली है"! आतंक की बोली है, "बुरा न मानो होली है"! जबरन, दबंग सोच बोली है, "बुरा न मानो होली है"! बलात्कार की बोली है, "बुरा न मानो होली है"! रंग तमाम सोच #UnHoly है "बुरा न मानो होली है"! सच से आँख-मिचौली है! "बुरा न मानो होली है"? गंगा स्नान की बोली है! "बुरा न मानो होली है"!  "आज सब चलता है," बोल शैतान हाथ फिसला है! किस संस्कृति की बोली है? "बुरा न मानो होली है"!! (अगर सोच में पड़ गए हैं या भावनाएं उछल रही हैं तो ये लेख भी पड़ लीजिए-) https://www.thelallantop.com/tehkhana/meow-how-holi-remains-a-festival-of-licensed-harassment-and-assertion-of-masculinity/amp/

रंग पहचाने से!!

अं धेरों पर रंग डालते हैं यारब , या रंग काले करते हैं दिल बहलाने को मज़हब ये कैसी चालें चलते हैं ! अ रसों से छुपाये थे , आज अंधेरे दिन में बाहर निकले हैं ,    रंगों की चादर ओढ कर , न जाने कितने हाथ फ़िसले हैं !! मुँ ह काला करने की रवायतें पुरानी हैं ,      सफ़ेदपोशों की कोई ये शैतानी है ! बु रा न मानो थोड़ी ज़बरजस्ती करते हैं , बाज़ार गर्म है , इज़्जत सस्ती करते हैं !!    घि स घिस के रंगी चेहरे सफ़ेद करते हैं , इस तरह लोग रातों को सुबह करते हैं ! अ पने मज़हब के हम यूँ ही यकीं हो गये , संज़ीदगी के अपनी ही शौकिं हो गये , आसमां अपने सारे जमीन हो गये दिल में डुबो हाथ , देखिये रंगीं हो गये हा थ रंगने को मिट्टी बहुत है , फिर भी लोग खून लाल करते हैं मौत कोई बीमारी नहीं है , काहे फ़िर मुर्ख इलाज़ करते हैं