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मोहब्बत फ़रीद!

सफ़र में तुमसे मुलाक़ात हो जाए, हमसफरी के ज़रा हालात हो जाएं! हम तो मुसाफ़िर हैं ज़िन्दगी के, बस उनके भी यही हालात हो जाएं!! मोहब्बत है झोली में और आरजू करते हैं, मेरी किसी ख़ासियत को वो मुरीद हो जाएं! यूँ तो हम अपने ही पैरों पर खड़े हैं, हसरत, की वो कंधो के करीब हो जाएं! यूँ हम अकेले ही अपनी नाक में दम करते हैं, जी करता है मेरी मुश्किलों की ख़रीद हो जाये! इस रस्ते आइये तो हम भी एक मक़ाम हैं, दुआ है, ये सफ़र आपको फ़रीद हो जाए! (farid -unique) इंतज़ार है पर हम कभी करते नहीं, कौन जाने कब, यकीं इतफ़ाक हो जाए! बेबाक़ी को मेरी बेसबरी मत समझिये, क्या हरकत जो होना है सो हो जाये!

फ़रेब दिल के!

आईने झूठे हैं या हम मुस्कराते हैं , दिल को कैसे कैसे फ़रेब आते हैं , युँ ही याद कर लेते हैं आपको , यूँ ही आपके करीब आते हैं , मुश्किल नहीं होती आपके जाने की , हम नहीं रोज़ नसीब आज़माते हैं , खामोश आहटें साथ चलती हैं , नहीं दुरियों का शोक मनाते हैं आपकी मोहब्बत के गरीब नहीं ,  फ़कीरी के वो अंदाज़ आते हैं ! न हों तो हर लम्हा बदल जाता है कहां हमको ज़ुदा हिसाब आते हैं ऐसे कोई अकेले कम नहीं पड़ते , पास आये तो दुरियाँ गिनाते हैं बिस्तर को अकेले कम नहीं पड़ते दो हों तो क्यों फ़ासंले गिनाते हैं ? दिल को कैसे कैसे फ़रेब आते है , सपनों में भी हमको आज़माते है

छलकते लम्हे!

युंही कोई बात नहीं होती, युंही कोई साथ नहीं होता फ़क्त ईरादे नेक रखिये, हर लम्हा हालात नहीं होता! वही पुरानी बात है, वही काली रात है, लम्हों का साथ है, शब्दों की बारात है!  दो पल गुम हुए, दुनिया घुम गयी किस ओर, डोर पकड़े बैठे थे, हाथ रह गयी एक छोर!  लम्हों का असर हो, लम्हों का कहर हो, ज़ुबाँ बयाँ करती है, जो लम्हों को नज़र हो!   खोये हैं देर से, या लम्हे युं ही सोये हैं कैसे काटें अकेले जब साथ बोये हैं!  क्या आप अपने लम्हों के सच्चे हैं,  या इस हिसाब में थोडे कच्चे हैं, लुड़क रहे, दिल ने जो दिये गच्चे हैं, क्या कीजे इश्क़ में हम बच्चे हैं!

सफर के नुस्खे

उम्मीद को आसमाँ बनाने से क्या होगा यकीन को जमीं कीजे! कल क्यों पेशानी पर लिखा   है आज सफ़र को हसीं कीजे!! जिन्दगी अपने हाथों में , नज़र आती है उम्मीद , सारी बातों में नज़र आती है सच्चाई , हंसती खेलती दिखती है इबादत , इरादों में नज़र आती है! अब   आपकी   अपने दिल पर नज़र होगी किसकी   आहट   पर धड़कन   असर होगी पास   आयेंगे तो पूरी कसर   होगी गुजरते लम्हों की रहगुजर होगी ये साथ मिल कर बनाया है , दीवारें अपनी हमसाया हैं काम बहुत हैं कब तक आगोश में बैठें बड़ी जतन से ये घोंसला बनाया है रास्ते में आये तो ख्वाबों से भी मिल लेंगे   फुर्सत में आये तो यादों से भी मिल लेंगे बादलों की छांव हमसफ़र नहीं होती घड़ी दो घड़ी उस से भी मिल लेंगे दूर के ढोल सुनने होते हैं ,  पास के बजाने होते हैं ऐसे मौसम आयें तो ,  कैसे बहाने होते हैं ! मासूम इरादों के बादल भी दीवाने होते हैं कौन कहता है की बचपन के ज़माने होते हैं .... सोचो तो दीवार है देखो तो दीदार   सोचो तो इज़हार है देखो तो प्यार