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मोहब्बत फ़रीद!

सफ़र में तुमसे मुलाक़ात हो जाए, हमसफरी के ज़रा हालात हो जाएं! हम तो मुसाफ़िर हैं ज़िन्दगी के, बस उनके भी यही हालात हो जाएं!! मोहब्बत है झोली में और आरजू करते हैं, मेरी किसी ख़ासियत को वो मुरीद हो जाएं! यूँ तो हम अपने ही पैरों पर खड़े हैं, हसरत, की वो कंधो के करीब हो जाएं! यूँ हम अकेले ही अपनी नाक में दम करते हैं, जी करता है मेरी मुश्किलों की ख़रीद हो जाये! इस रस्ते आइये तो हम भी एक मक़ाम हैं, दुआ है, ये सफ़र आपको फ़रीद हो जाए! (farid -unique) इंतज़ार है पर हम कभी करते नहीं, कौन जाने कब, यकीं इतफ़ाक हो जाए! बेबाक़ी को मेरी बेसबरी मत समझिये, क्या हरकत जो होना है सो हो जाये!

इतफ़ाकी मोहब्बत अपवादी इश्क़!

हाथ पकड़ लेंगे मंझधारे, साहिल कब से सोच खड़े हैं, बरसों से रस्ता तकते धारे हैं, सोच किनारे किस बात अड़े हैं! पहली नज़र का प्यार क्या है? एक उम्र इंतज़ार क्या है? हमेशा रहेगा एतबार क्या है? सर पर भूत सवार क्या है? इश्क एक एहसास है, एक लम्हा कोइ खास है क्यों उम्र भर उम्मीद ओ' सात जन्म कि बात है? मोहब्ब्त में हर घड़ी जन्नत है, फ़िर क्यों सात जन्म की मन्नत है? इश्क जिस्म है तो तमाम हैं, रुह है तो एक है, इतेहाद है, ज़ज़्बात है तो पल की बात, सोच, एक ख़याली पुलाव है! दो दिल मिल जाऐं तो इश्क है, ख़्यालात एक हों तो इश्क़ है, मुख़ालिफ़त दिलकशी की बात, क्यों किसी को किसी से रश्क है? इश्क़ घरफुँक तमाशा है, जन्नत नसीबी का रास्ता है, कोई एकदम अकेला इसमें, किसी का दुनिया से वास्ता है! जिस इश्क़ में सब जायज़ है, वो सोच कितनी नाज़ायज़ है?

कैसे कहें कि इश्क़ है!

शौक इश्क है, कद्र इश्क है, समझ सके किसी का, वो दर्द इश्क़ है! इश्क़ नज़र है, मिलना, झुकना, फेर लेना, तरेर लेना, चुराना, नचाना कभी बचना, कभी बचाना इश्क इलाज़ है, मर्ज़ नहीं, रवैया है दिल का, फ़र्ज़ नहीं,  बचपन है, बचपना नहीं, सोच में पड़ गये, फ़िर इश्क़ क्या? इश्क़ सफ़र है, रुकने का नाम नहीं, क्यों आप किसी जिद्द पर अड़े हैं? 'हम ऐसे ही' तारीख़ हो गयी बात है, हाथ में हाथ है अब बदले हालात हैं! इश्क़ एकतरफ़ा ही होता है, इसमें इतफ़ाक तमाम होता है! जरुरत होती है किसी को, कहीं फ़क़त ज़ज़्बात होता है! इश्क़ ज़ज्बात है, हरदम किसी का साथ नहीं, अपने से भी कीजे थोडा, यूँ बुरे हालात नहीं!! इश्क़ नज़र है, हरदम नज़र मिलने की बात नहीं, अपने गरेबाँ झांकिए ये आइनों की बात नहीं!! वो लम्हा जब आसमाँ के नज़दीक खड़े, बादलों से बतियाना इश्क़ नहीं तो क्या? और अचानक नज़र आये फूल को उठा, सूंघ कर मुस्कराना इश्क़ नहीं तो क्या! रास्तों में एक मोड़ है इश्क, मुसाफिरी आशिक़ी का नाम है! क्या फर्क पड़ता है हमसफ़र, कौन, और कितनी दूर कोई मक़ाम है?