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आज सुबह! 18 मई 2019

सच क्या है, क्या वजह है, कहाँ हैं आप, क्या जग़ह है? वक्त किसके पास, किसकी रज़ा है? करने को कुछ नहीं ये ही अज़ा है! सुबो आज भी क्यों लगती बेवज़ह है, चमक रंगीन रातों की आंखों जमा है! दिखता है हसीं पर क्या वो फज़ा है? नज़र नहीं आता वो तीर-ए-कज़ा है? जो सामने है वो सच है यही ज़ाहिर भी? व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का यही मज़ा है? उग रहा है सूरज पर क्या ये जग़ह है? सोए हैं जमीर सब के, कौन जगा है? सच मान के होंगे या कुछ जान के? कैद हैं कितने उनके यकीन सज़ा हैं!! रज़ा - मर्ज़ी; अज़ा - शोक मनाना;  फज़ा - माहौल; तीर-ए-कज़ा - मौत का तीर

घुम्मकडियाँ!

इतिहास का इरादा क्या था? यूँ खड़े होकर, सरचढ़ बोलते, अपनी कहानी कहता है या मुँह चिढ़ा रहा है हमको? तुम ने कौन सा तीर मार लिया? अदना बन कर खड़े हो? हमारे साथ सेल्फ़ी लेते, लोग तुम्हें शायद लाइक करें?