निसर्ग से अगर तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं तो क्या इंसान से है? निसर्ग यहीं है ..यहीं है पेड़, पौधे, नदी, झील सारी विलक्षण सरजमीं और उसकी सुन्दरता और अगर हम उस सब से जुड़ नहीं सकते, तो क्या हम एक दुसरे से भी जुड़ सकते है? ? (जिददु कृष्णमूर्ति के विचारो से अनुरचित)
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।