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निसर्ग

निसर्ग से अगर तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं   तो क्या इंसान से है? निसर्ग यहीं है  ..यहीं है पेड़, पौधे, नदी, झील सारी विलक्षण सरजमीं और उसकी सुन्दरता और अगर हम उस सब से जुड़ नहीं सकते, तो क्या हम एक दुसरे से भी जुड़ सकते है? ? (जिददु कृष्णमूर्ति के विचारो से अनुरचित)