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तू हसीं मैं यकीं!

तू हसीं हैं मैं यकीं हूँ, तू ज़मीं है मैं ज़मीं हूँ, ज़रा सा तू, ज़रा सा मैं, इस फलक की ज़र कमी हैं, हमकदम भी, हमनशीं भी, रास्तों के नशेमन लिए, हमनज़र भी, हमसफ़र भी तू असर है, मैं कसर हूँ,  तू खबर ओ मैं ख़ामोशी, मेरे शोर की तू सरगोशी, तू मय भी ओ मयखाना, मैं साकी ओ मैं पैमाना, नाप रहे है अरसों से, एक दूजे को हम रोज़ाना,  पुरे नहीं पड़ते कभी भी, खर्च हुए पर बिन हर्जाना, ज़िक्र आया तो कह देते है, लाखों अफ़साने क्या क्या फ़रमाना, मिल जाएँ गर किसी मोड़ तो, मत कहना की न पहचना!