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आज़ादी के गुलाम!

किसकी मज़ाल की आज़ादी पर सवाल करे, पुलिस, अफसर, जज, पत्रकार सब साथ हैं! कश्मीर से आज़ाद हैं? कश्मीर में आज़ाद हैं?  कश्मीर के आज़ाद हैं? या क्या फ़र्क पड़ता है? भारत की सरकार आज पूरी आज़ाद है,  जिम्मेदारी से, जवाबदेही से, रामकृपा! ऐसी भी क्या आज़ादी के ख़ामोश बैठे हैं,  सब जानते समझते बोलती बंद हो गई? सुप्रीम कोर्ट के जज हैं, या कोई दरबारी?  किस को न्याय है किसकी तरफ़दारी? सहूलियत की जंजीरें कैसे तोड़ दें,  आज़ादी के लिए कैसे मस्ती छोड़ दें! खामोशी आज़ाद है, सवालों को कैद है,  क़ातिल आज़ाद है बेगुनाह सूली चढ़ें! चुप रहिए कि आप आज़ाद हैं,  बोलने वाले सब बरबाद हैं!

छुट्टी का दिन!

हुई कि नहीं सुबह? दिन निकल आया  रोशनी भी है पर ना सूरज है ना सुबह की चमक? हवा झकझोर रही है, बादल घनघोर रहे हैं, चाय का जायका वही है! पर असर अलग हो गया मौसम छुट्टी वाला है, पर यह कैसे समझे और किसे समझाएं? जुत गए हैं सुबह सब फिर से, कल को आज और आज को कल करने में! वही अपनी हाजिरी भरने में? बैल खेत जोत रही है, गधे घास  चर रहे हैं, भेड़ चाल चल रही है,  और हम इंसान सर्वोच्च प्राणी, आजाद, समझदार, चलिए जाने दीजिए देर हुई तो फिर ट्रैफिक में...

आधाजी आजाजी आदाजी!

कश्मीर में उम्मीद कैद, आवाज़ कैद, सारे एहसास कैद, और भी गम हैं जमाने में मोहब्बत के सिवाय! और लगे हैं सब भेड़ बनने में और भी राय हैं दुनिया में सबकी एक राय नहीं, आंखे खोलिए, सुनिए, मत कहना बताए नहीं! जवान को फ़रमान बस बलि के बकरों को शहादत का झाँसा, वाह! सियासत क्या खूब तूने फाँसा! ताकत सड़कछाप बन गयी है चुप, ख़बरदार, मुँहबंद, ये जुर्रत कुछ कहने को है, ये हिम्मत? "जी हुजूर" बस इतनी इजाज़त है, बहाना है कहना "लोकतंत्र" आदत है!! चुप, नफ़रत जारी है मंदिर कहीं बनेगा, मस्जिद कोई गिरेगा, और सब ख़ुशी से बेड़ियां गले लगाएंगे! खासी तैयारी है "जी हुजूर" बस इतनी इजाज़त है, बहाना है कहना "लोकतंत्र" आदत है!! कुछ बोलना भारी है कितनी बरबाद आज़ादी है? गूंगी एक बडी आबादी है! चलिए घांस चरते हैं,  या चल कहीं मरते हैं! धर्म के अंधे सब मंदिर कहीं बनेगा, मस्जिद कोई गिरेगा, और सब ख़ुशी से बेड़ियां गले लगाएंगे! खामोशी गुनाह है हमसे म...

अंधे आसमाँ 3

मेरी प्यारी बर्बादी अपने लिए अपनी ही हवस , ख़ुद को बनाएगी या मटियाएगी? एक हक़ीकत मेरी , मेरी कितनी सच्चाइयों को निगल जाएगी? मैं कम हूँ या ज्यादा कम? रिजल्ट हूँ अपना , या दुनिया का थन , किसी के हाथों निचुड़ता , पिघलता , रहने को आजाद , और बहने से बर्बाद? क्यों ने अपनी बर्बादी अपने हाथों ले लूं?

कितने आज़ाद!

जो आज़ाद हैं, बेशर्म, बेबाक हैं, आपके गरेबाँ पर उनके हाथ है!! आज़ादी उड़ती नज़र आती है हाथों से, डोर कहां है ज़रा गौर कीजे हालातों पर! आज़ादी के इस मुल्क में कैसे नसीब हैं, अपने हैं सियासी सारे जो इस के रकीब हैं! किसी को मन की बात है, किसी को घूँसा लात है, एक आज़ादी है जो नाले से गैस बनाती है, राफेल का दाम बढ़ाती है, गुंडों को भक्त कहलवाती है, गौरक्षक से बंब बनवाती है, एक आज़ादी जिसके गले पर कसा हाथ है, क्या मर्ज़ी, क्या मजाल है, रोहित के गले मे फंदा है, बालिका ग्रह में बाप नंगा है, उमर बंदूक के निशाने है, नफ़रत को देशभक्त बहाने हैं! आप भी कहिए मन में क्या बात है, आज़ादी एक दिन है या हालात हैं? आपको अपने विरोधी इंसान लगते हैं? क्या सवाल पूछना देशद्रोह है? राष्ट्रवाद क्यों शातिर गिरोह है?

आज़ादी के नंग?

आज़ादी का ऐसा नशा के जंज़ीरें नहीं दिखतीं, तस्वीरों से खुश हैं सब, फूटी तकदीरें नहीं दिखतीं! तमाम फ़कीरी मज़हबी लकीरों में सिमटी है, उसूलों की किसी को गऱीबी नहीं दिखती? 60 बच्चे चंद हो गए, ज़हन ऐसे गन्द हो गए? चीख़ रहे हैं सब ख़बरी ऐसे, कि हम अपनी बोलती के बंद हो गए? एक क़ातिल, एक उठाईगीर को रहनुमा किया, क्यों हम इतने अक्लमंद हो गए? अपने ही पड़ोसी पर शक है, क्यों मोहब्बत पर नफऱत के पैबंद हो गए? जो हमराय नहीं होता वो रक़ीब है,  कब से सोच के हम इतने तंग हो गए? ये कैसी आज़ादी आयी,  सब के सब रज़ामंद हो गए? शोर मचाओ, वंदे गाओ, आज़ादी के सब नंग हो गए? ......  बेहरेहाल आज़ादी मुबारक़ हो अगर आप आज़ाद हैं!! #फ्री #आज़ादी #स्वतंत्रता #freedom #independance

फार्मूला-ए-देशप्रेम!

देश भक्त होना कितना आसान है, घर बैठे बैठे करने का ये काम है, सरकार ने नए फॉर्मूले बनाए हैं, माँ कसम, इतने सरल उपाय हैं! फॉर्मूला नम्बर 1 "ख़ामोशी सोना है" बोल कर क्या होना है? चुप रहिए, "शांत रहो", अपने ज़मीर को कहिए, सरकार, जनता की, जनता के लिए, गलत कुछ कर नहीं सकती, आपको यूँही शक है, और शक का कोई इलाज नहीं, इस फॉर्मूले को प्रधानमंत्री का सपोर्ट है, अगर आप नहीं करते तो आपके मन में खोट है, आप देश द्रोही हैं, और आपको डंडा मिलेगा, सख्ती से आपको सच मिलेगा! फार्मूला नंबर 2 लाईन में खड़े हो, जितनी लंबी लाईन, जितनी देर, आप खड़े खड़े समय बिताएंगे, आप अपने आप देशभक्त गिने जाएंगे, पैसा तो वैसे भी हाथों का मैल है, आज नहीं तो कल, ...कल....कल हाथ आ जायेगा! अब ख़ाली ज़ेब वाला भी, देशभक्त कहलायेगा! (चेतावनी "मेरा नम्बर कब आएगा" ये पूछना पाप है, ) लाइन में खड़े रहने, आपके लिए एक जाप है, इसमें राम बाबा की छाप है, पतन को अंजलि दीजिए, कहिए, 'अच्छे दिन आएंगे' ....साँस अंदर .....साँस बाहर फार्मूला नम्बर 3 लकी रंग अपनाएं, भगवा या ...

देशशक्ति - खोखली देशभक्ति!

हमे था जिसका इंतज़ार ये वो सहर तो नहीं, गाँव में नहीं रहता मुल्क, शहर में मिलता नहीं!  (हजारों लोग रोज गाँव से पलायन कर रहे हैं, और  शहर का कचरा बीनते हैं) न आज़ादी कि सहर हुई,  न जनतंत्र कि सुबह,  मज़हब, जातपात के मौसम कभी बदलते नहीं! जात-पात, धरम-भरम, अपनी अपनी जेब गरम, सौ चूहे खा बिल्ली बोले, जय भारत, वन्देमातरम (हमारे देश के नेताओं कि कहानी) कितने इरादों को कब्र करतें हैं, इस मुल्क में सब सब्र करते हैं! (मस्जिद टूट जाती है, दंगे करने वाले सम्राट बन जाते हैं, बलात्कारी दुल्हे बन जाते हैं) देशभक्ति अगर ज़ोर मार रही है, तो चंद सवाल आईने से पूछ लीजे? (क्या सारे देशभक्त ईमानदार हैं, नेता, अफ़सर,कारोबारी) जय है, भारत माता की जय है, देशभक्त गुंडों का बड़ा भय है! देशभक्तों की बडी गैंग बनी हैं, जो सावधान नहीं उसको विश्राम है! सच बात कहना अगर भय है, तो क्यों जय जय जय जय है? (देशभक्ति की बात आती है तो हमेशा मार-पीट क्यों होती है?) मस्जिद की छत नहीं संविधान की गत थी! (आपकी राय नहीं, संविधान का पहला पन्ना जानिए) सच से सबका झूठा नाता...

आज़दी क्या?

क्या आप आज़ाद हैं, या अपनी जंजीरों के बर्बाद! (धर्म के नाम पर तोड़-फ़ोड, हत्या-बलात्कार, आसाराम, राधे मां और तमाम बाबा और स्वामी) कहिये कि कैसे सिर्फ हाँ बन जाएं, बेहतर है इससे कि बेज़ुबाँ बन जाएँ! (आर.टी. आई कार्यकरताओं की सरे-आम हत्याएं) अंधविश्वास विज्ञान है, मेरा भारत महान है! (झारखंड़ में ११ महिलाओं को ड़ायन बोलकर हत्या) आज़ाद हो इसपे शक मत करो, नासमझी गुनाह है इस दौर का? क्यूँ इस तरह आज़ाद हैं, सवालों वाले बर्बाद हैं? सर घुटनों में रखिये तो आप आज़ाद हैं जो सीधे खड़े है उनको हुकूमत सैयाद है (तीस्ता के पीछे बड़ी सरकारी ताकत) आज़ादी कहाँ हैं, ये प्रश्न जहां है! (हज़ारों जनसंघर्ष में‌ लगे कार्यकर्ता) बड़े आज़ाद हैं हुक्मरान सारे, ख़ासी मनमर्ज़ी शौक हैं उनके! (हमारे राजनेता) बड़ी मजबूरी है सबको आज़ाद दिखने की, और ये ड़र कि कहीं ज़ादा आज़ाद न दिखें! ( हम में से कई जो सरकारी / बदमाशी ताकत के सामने भीगी बिल्ली , रिश्वत देते वक्त मजबुर और बाद में गप करते वक्त गुस्सैल और देश भक्ति का नाम लिया तो ५६इंच सीने वाले बन जाते हैं)

आज़ादी किस से?

खुद से छुपने को आईने पे टिकते हैं , अपने ही हाथों बड़े सस्ते बिकते हैं ! सफ़ाई देने को तमाम बातें कहते हैं , अपनी ही गंदगियों से मूँ फ़ेर रहते हैं ! बढा - चढा के बातों से शान करते हैं , वतन परस्त सच्चाई बदनाम करते हैं , मुख़्तलिफ़ राय है नाइतिफ़ाक करते हैं , क्यों शिकन है जो यूँ आज़ाद करते हैं एक ही इबारत है सब बच्चे बेचारे पड़ते हैं , फ़िर क्यों आज़ादी के इतने झंड़े गड़ते है आज़ादी के गुलाम सारे एक चाल करते है , सच साफ़ न हो जाये कम सवाल करते हैं ! जख्म नासूर हो गये है माँ के दामन तले देशप्रेम सब क्यों आँखों पर पर्दे करते हैं!  बेगैरत अपने ही मज़हब के अमीर सारे , देख दुसरे को क्यों मुँह में लार करते हैं ? मुख़्तलिफ़ - different ; नाइतिफ़ाक - Disagree; इबारत -writing style

मैं !

कुछ् और हैं हलचल जहन की, जायज़ कीजे, "मैं" मचल रहा है मन में, क्या माफ़िक कीजे! शहीद हो गये मेरे खुदा मेरे पैदा होने को, कितनी मशक्कत है एक यकीन होने को मैंने ही अपने जहन में सेंध लगा रखी है, ढुँढता हूँ लोग कहते हैं चीज अच्छी है! "आज़ादी मेरे सवालॊं से मुझको नही मुमकिन, मैं अपने नज़रियॊं की जंज़ीरों में बंधा हूँ!" परेशां है सब कि रस्ता कुछ दुश्वार है,  मैंने अपने हि रस्ते गड़्ड़े खोद रखे हैं! मुबारक हो जिसे चाहिये चैन, सुकुं, आराम, मुझे बस अपने हिस्से की परेशानी कुबूल है! मैं कहता हूँ मेरा जिक्र करना फ़ुज़ूल है,  आपकी तवज्जो ही अपना पैसा वसूल है! "फ़ुर्सत नहीं काम की मुझे आराम करने दो, जिंदगी मेरी है मुझे ही आसान करने दो !" "मेरे रास्ते क्यों हैं आपकी नासमझियाँ, क्यों मेरे सफ़र में आपकी बदमिज़ाजियाँ, ये वक्त अभी मेरे होने का है, इंसाँ! रास नहीं आती मुझे आपकी समझदारियाँ! "कोई सुबह कभी पुरी नहीं होती, काश कोई मज़बूरी नहीं होती, जुटे हैं जोतने सब सारे समय को, हमसे ये मज़दूरी नहीं होती!

जश्न-ए-गुलामी!

चलो गुलामी के जशन बनाएँ वही ठीक है जो होता आया है, स्थिरता कितनी अच्छी चीज़ है, सब कुछ वही....! सही! ज़माना खराब है, नयी चीज़ क्या भरोसा? आज़ादी? बाप रे बाप! आज़ाद खयालात? यानी, सारी मुसीबतों की जड़! छूट जायेगी, बनायी है जो पकड़, बचपन से अब तक, कितनी मेहनत से, भावनओं में जकड़ आश्रित बनाया है, पालन-पोषण का यही सरमाया है, जी जान से किया है अपने पैरों पर खड़ा, उम्र लग गयी, भरने में खाली था घड़ा! कहते हैं, सोच को खुलने दो ख़बरदार, वर्षों की मेहनत मिट्टी में घुलने दो? आखिर कुछ सोच-समझकर ही सब कुछ “तय” है! दुनिया चल रही है, क्योंकि दिलों में भय है! आज़ाद हुए खयालात, तो डर भूल जायेंगे कड़वे सच, व्यवस्था के ठेकेदार कहाँ पचा पायेंगे, बात बढ़ जायेगी, जंग छिड़ जायेगी, और हम अमन पसंद हैं नाक-बंद कर लेंगे, अगर सामने गंद है, दुनिया जैसी है, वैसी ही रहने दो, कुछ आजाद खयालात, गुमशुदा होने दो, अच्छा है! जो “त्याग” करना, संस्कृति की शान है, दो पल शांत , सर झुकाएं चलो! गुलामी का जश्न मनायें!

लापता रंग!

कहते हैं आज़ाद है, सुनाई देता है, फ़िर क्यों  लगता है ये झुठी आवाज़ है, प्रश्न सर उठाते है, ' आज़ाद है ' कौन, किससे, कब, कहां  ? क्या नहीं दिखता ? दबा, झुका, सिमटा, रुका, अटका,भटका पस्त, लाचार, रेंगता, लड़खड़ाता आपको नज़र नहीं आता? जाहिर है, आप सावधान में खड़े हैं अपनी मान्यताओं में गड़े हैं  नज़र उपर है, क्योंकि झंड़े खड़े हैं, और पांव तले रेंगते हुए सच, नज़र नहीं आते    जाने दीजिये, आपकी मज़बुरी है, आप आज़ाद हैं ये जश्न आपको मुबारक हो!

काबिले आसमान!

रंग बिखरे हैं जमीं पर इकट्ठा का कीजे सुन्दर को सपनों  की सजा का दीजे पंख सबके हैं एक दिन उड़ जायेंगे जमीं अपनी होगी तभी आसमाँ अपनाएंगे हुनर सब को है बस यकीन दे दीजे हंसी खो जाये इतनी कन्धों को उम्मीद का दीजे क्यों नहीं हो सकते मंजिलों से आजाद उठते क़दमों को लकीर का दीजे सब के अपने समंदर हैं तर जाएंगे, आपके कुँए में बेवजह फंस जाएंगे, उम्मीदों के जाल गला घोंट देंगे, अपनी नज़रो से आप समझ पाएंगे???? दुनिया चलती है क्योंकि मधुमक्खी उड़ती है, अपने आइनों को ज़रा बड़ा कर लीजे, हमारा होना मुर्गी-अंडे का सवाल नहीं है, बस अपने पैरों पर खड़े हो लीजे!

समीकरण/MATRIX

हर लम्हा सिखाता है इज़हार क्या हो जरा सुनिए दिल की आवाज़ क्या हो कहने को बहुत करने को बहुत दुनिया का शोर, डरने को बहुत कहता है प्यार मरने को बहुत समीकरण नहीं दिखता, तो जंजीर क्या नज़र आएंगी जिंदगी हर लम्हा भरमायेगी चलने से पहले क़दमों के निशाँ नज़र आते हैं और सोचते हैं अपने रास्ते जाते हैं, वक़्त आयेगा नहीं, आप को आना होगा प्यार वो है जो जमीं बने आसमान बने निशाँ नहीं, परछाई नहीं एक है सच कहने करने की बात नहीं जुडना पड़ता है पंख नहीं होंगे यकीं से उड़ना पड़ता है