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दुनियादारी!

रंग हर एक को, एक जैसे नज़र नहीं आते,  खाली पेट फ़ीके रंग, भरी ज़ेब चटक जाते! खुद से आप किस ज़ुबान में बोलते हैं,  थपथपाते हैं पीठ या हमेशा तौलते हैं? सुनते हैं, क्या, चुनते हैं, अनसुना करते है!  युँ भी हम सोच का तानाबाना बुनते हैं!! दुनियादारी ज़ंजीर है गुलामी की,  समझदारी वो जो आज़ाद रखे,  एक ही तरीके सब के बात मशीनी है,  बात वो जो आपको बेबाक रखे! खुद को कम करने के हज़ार नुस्खे हैं, बाज़ार भरे हुए हैं बदलते रंगों से! कुछ चाह कर बदलते हैं, कुछ आह कर, कराह कर कुछ न बदले बदलते हैं, की दुनिया उनकी बदल गई!   शाबाशी दे कर गिरफ़्त में लेती है, ईनाम में जो मज़ा है, एक तरह की सज़ा है, लगाम पर आपकी हाथ किसका है? आप की दुनिया क्या, किस दुनिया के आप, आपके हैं दायरे या, किन्हीं दायरों में आप!

ये कैसे रिश्ते?

रि श्ते 'जरूर' होते हैं,  क्यों पर मजबूर होते हैं?  जितने नज़दीक हों,क्यों,  उतने मगरूर होते हैं?  रिश्ता मतलब साथ है  इज़्ज़त है, विश्वास है  फ़िर क्या इतना उकसाता है?  क्यों कोई हाथ उठाता है?  अब क्या रिश्ता रह जाता है? क्या सिखा रहे हैं रिश्ते,  समाज धर्म, व्यवस्था  "गर्व करो" जो जैसा जहां  सवाल की जगह,  कहां?  बड़ो की मानो  वो भी नतमस्तक होके परंपरा जानो, मानो  सीता पर शक  द्रौपदी पर बाज़ी,  काट दो नाक कान  अगर नहीं राज़ी  लगा दो इल्ज़ाम  "शूप्रणखा" वो कौन सी दुनिया होगी,  सब की जिसमें जगह होगी?  साथ ही साथी की वज़ह होगी  मोहब्बत इज़्जत से नापी जाएगी  ताकत सरताज़ नहीं होगी,  खुद को बनाने के लिए  दुसरे को तोड़ना नहीं होगा,  दुनिया के नाप से कोई  कम न होगा,  आज़ादी और क्या है?

रोज़ होते कम!

कितने टूटे हैं हम, कितनी दरारें हैं, रिस रहे हैं  हज़ार जगहों से, लाख वजहों से, कितने कम पड़ते हैं, अपना कहकर, अपनों से लड़ते हैं, छीन लेने को,  उनका यक़ीन, उनका प्यार ज़ख्मों का कारोबार, हिंसा का सिक्का, इतना डर? कैसे इतने हम खर्च हो जाते हैं? खुद को भी बचा नहीं पाते हैं? दुनिया की बंदर बांट में, फिट होने को, बहाना! खुद को तराशते हैं।  सच कुछ और! ख़ुद को ही काटते, छांटते, नापते, हर मोड़ कुछ और कम हो जाते हैं, और फिर  ख़ुद को ही ढूंढते हैं, ज़हन में दरबदर घूमते हैं, न ख़त्म होने वाली तलाश, हमारी लाश! कितने हम बिखरे पड़े हैं, टुकड़ों में,  हर जगह, घर में, दुनिया में, अकेले में, काम पर, दोस्तों के साथ, हर जगह,  अधूरे बड़े हैं, हर लम्हा पूरा होने, खर्च होते हैं, चमक चुनते दुनिया कि, अपने अंधेरों को शर्माते हैं, अपने सामने, खुल कर कब आते हैं? नाम कमाने को अपना, ख़र्च हुए जाते हैं, बड़े सस्ते  खुद को निपटाते हैं! भीड़ में एक नाम? जय श्री!!!

प्यार साथ रिश्ता

(created from writings of Abha Jeurkar FB Post -  I don't have grandiose or romantic ideas about love. I don't think there are soulmates or that matches are made in heaven. However, I do think that romantic love is a valuable human construct and that it can serve the needs of people in the way societies are organized at present. I think that the space that partnership allows is very beautiful, as it allows the partners to be vulnerable, to explore another human being up close, closer than most others. Relationship of equals can allow for comfort as well as adventure/space. I think these intimate spaces can be great learning spaces if one is allowed to explore them in these ways, even though that might mean making mistakes and getting back up. Such partnerships based on respect and love cannot be a reality if people are coerced into them, or they are manipulated into being in them forever. Choice is the cornerstone. It...