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संदेश

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भीड़ भेड़ भगवान!

  भीड़ भगवान हो गई है, तीर्थस्थान हो गई है, कुंभ का स्नान हो गई है, मोक्ष का सामान हो गई है, स्टेशन बैठे चार धाम हो गई है! किस ने सोचा था? ये दिन भी आयेगा, बराबरी की लड़ाई, ऐसी टु के कोच लड़ी जाएगी, जिसकी लाठी उसकी सीट हो जाएगी, हक की बात इतनी आसान हो जाएगी, भीड़ ही संविधान हो जाएगी! कुंभ जाने की ये विधि  विधान हो जाएगी! सब एक हो गए हैं, एक संदेश, एक दिशा (भ्रम), मंदिर वहीं बनायेंगे, मस्जिद वहीं गिराएंगे, उसी मुहूर्त नहाएंगे, करोड़ों की भीड़ बनेंगे, सब भेड़ हों जाएंगे!

बा_रतन

  दाढ़ी–टोपी कत्ल कर मन धीर लिया बनाए, फिर बा को रत्न मिले, सबका मन ललचाए, मन ललचाए गुंडन का सो मुंडन लिए कराए ढाई आखर कत्ल का, किए सो लड्डू खाए! लड्डू खाखा घी के गंगा लिए नहाए, दोष अगर कोई है वो पानी पानी हो जाए! पानी कर दिए खून का इतना उसे बहाए, प्रभुवर आईने देख कर चुल्लू पानी जाएं! पानी पानी हुए जो ताला मुंह पे लगाए, रामराज में बोल दिए तो जेल बुलावा आए! जेल हवा खाए जो भी सीधी रीढ़ दिखाए, दंगाई राजा भौंक के पिरजा भेड़ बनाए!

भीड़ की रीड!

सवाल?  क्यों लोग लगे रहते है दिन भरने में,  रोज़-रोज़ वही करने में जिसमें जी नहीं? ये कहते हुए कि ये ज़िंदगी का सच है,  गुजारे की demand - too much है? क्या उऩ्हें मजबूर करता है? अपने अंतर से दूर करता है? क्यों ये सवाल? क्यों वक्त के मारों के जख्म पर नमक छिड़क रहे हो मेरे भाई ? चल रहे हैं वही जिंदगी ने जो राह दिखाई , आप ने सपनों को रास्ता बना लिया , अपनी मुश्किलों का नाश्ता बना लिया , आईने के सामने खड़े होकर सिर्फ़ अपनी खूबसूरती या  उसकी कमी को परखने कि जगह , आपने सवाल पूछ लिये ? तो लो अब भुगतो , अब आपको जिंदगी मज़े से जीनी पड़ेगी , कभी आप भी परेशानियों से अपना सर खुजाएंगे , ( तेल क्यों नहीं लगाते हीरो ) पर फ़िर भी मुस्काराऐंगे , आपने अपने सपनों को पालना सीखा है , पर घर और स्कूल में उनको टालना सिखाते हैं , और जरूरतों का क्या बतायें , उसकी परिभाषा कहां से लायें , देखो तो , लाखों हवा खा कर भी जिंदा हैं ? सवाल लाख टके का है ? ताकत किसके हाथ में है ? " कौन कहता है कि चक्की में पिसे रहो ?" घर - बाहर , स्कू...