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यूँ होना!

मुझे खोना नहीं आता 'मैं' हूँ पर होना नहीं आता, चादर बहुत हैं सोने को, ओ मुझे बिछौना नहीं आता गम हमको भी हैं तमाम, उनके कंधे रोना नहीं आता अकेले भी अच्छे हैं बहुत, गोया हमें खोना नहीं आता!! उनकी एक ही शिकायत बस, जहां हैं वहां होना नहीं आता! आख़िर भूल जाते हैं सब, सबको, हमें किसी का होना नहीं आता! फर्क पड़ता है, क्या फर्क पड़ता है? क्यों हमें हक़ीकत होना नहीं आता? खुश होंगे सब इसलिए कह दें? हमें बातों को चाशनी डुबोना नहीं आता

अपनी बातें!

कह दिया सब कुछ और अब शिकायत, हम बात करते हैं तुम्हारी बातें नहीं रहतीं! साथ सोये थे कल रात और अब ये बात, तुम्हारे साथ हमारी राते भी रातें नहीं रहती! एक ही लड़ाई है दुनिया से, हम दोनो की, साथ हों वो तो लड़ाई, लड़ाई नहीं रहती! यूँ नहीं कि हमको कभी शिकायत नहीं कोई, वो पुछ लें तो शिकायत, शिकायत नहीं रहती! कुछ गलतियाँ हम अक्सर कई बार करते हैं, हमें आदत है और उनको आदत नहीं रहती! दुनिया कि नज़रों में दोनो ही काफ़िर हैं, कैसे कहे हमारे बीच इबादत नहीं रहती! खुदा नहीं कोई अपने, फ़िर भी फ़रिश्ते हैं मुश्किलें यूँ ही हमारी, आसां नहीं रहतीं!