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बचे बच्चे!

बच्चे मन के सच्चे, 'बड़े' कान के कच्चे, मज़हब ढोंग दिखावा, भारत भाग विधाता!   कहने की बात की बच्चों में भगवान है, सच्चाई ये की आधे-अधूरे इंसान हैं!   वो तोड़ते पत्थर धूल से लथपथ कर, आप तालियां बजाइए चाँद की यात्रा पर! बच्चे हमारा भविष्य हैं, कहावत है, लाखों भूखे-नंगे है किसकी ज़हालत है!?    कचरे में चुनते हैं धड़कन ज़िंदा बच्चे, मुर्दा बचपन! बच्चे सब को प्यारे हैं, फिर क्यों? अनगिनत बेचारे हैं!? बच्चों के लिए सबको बड़ा प्यार है, इस प्यार के लाखों बड़े गुनहगार हैं! 'अपने ही'बच्चों को सब ज़ख्म देते हैं! फिर भी हम अपनों की कसम लेते हैं? अगर एक भी बच्चा भूखा है, तो देशभक्ति का इरादा झूठा है!

रोशनी की साज़िश

तमाम रोशनी,  रास्ता रोशन करते! रास्ते किसका? कौनसा? किसके वास्ते? और जो दिख नहीं रहे? रोशनी के एकछत्र राज्य से, गुमनामी का शिकार, उन रास्तों का क्या? रोशनी चौंधियाती है,  मरीचिका,  आपको बुलाती है, और वो भी सतरंगी! चुनने की चुनौती,  और दौड़ में,  आगे रहने की पनौती, क्या आप अपने अंधेरों को जानते हैं? उनसे बात करते हैं या फिर जज़्बात? फिर कौन सी रोशनी चुनेंगे? कौन सा रास्ता? अपने अंधेरों को सुनेंगे या  चमक को गुनेंगे ? अंधेरों में आईने नहीं बोलते,  आप और आपके सच,  साथ  होते हैं, और  आप आप होते हैं! बाहर की रोशनी चमक है,  अंदर होगी तो आप रोशन होंगे! आपकी क्या समझ है?

भारत माँ की.....

भारत माँ की बेटियों को पेट में मारा जाता है, जय भारत माँ की जमीं पर जीवन उगाने वाले आत्महत्या कर रहे हैं, जय भारत माँ की, साँसे फूलती हैं तरक्की के धुँए से, जय भारत माँ की, औकात एक मज़हब, एक भाषा तक सिमटा दी, जय भारत माँ की, बेटियां बाज़ार में जिस्म बेचती है, और बेटे खरीद रहे हैं, जय भारत माँ की, ठेकेदारी, गुंडों के हाथ पड़ गयी है, जय भारत माँ की, इंसानियत एक जात है, यहां पैदा होना अपघात है, जय भारत माँ की, रसोई एक अखाडा है, गाय ने इंसान को पछाड़ा है, जय भारत माँ की, शिराएँ (नदीयाँ) श्री नाला बनी है, शंकर को रवि का श्राप लगा है, जय भारत माँ की, औलादें, सड़क किनारे और स्टेशन प्लेटफॉर्म पर बीड़ी मारती और डंडे खाती हैं, जय क्या आप को अब भी लगता है? भारत एक माँ है? या ये कहना गुनाह है? आपकी भी जय!!

देशद्रोही कौन?

देशभक्ति की हवा चली है, सब की तरह में भी भावनाओं में, बह गया हूँ, लगता है जो नहीं सहना था सह गया हूँ, देशभक्ति अब सड़कछाप गुंडागर्दी बनी है, कमजोर की आवाज़ उठाने वालों से ज़म कर तनी है सच हज़म कर सकते हैं तो सुनिए, आप हम सब देशद्रोही हैं, तरह तरह के आकार प्रकार में आते हैं, 1- देशभक्त देशद्रोही- ये हैं सबसे घातक देशद्रोही, इनके मुँह पे हमेशा भारत माँ का नारा है, ये भृष्ट हैं, गुंडे हैं, नेता, पत्रकार, खाकीधारी, भगवाप्रहरी, खुद आरोपी, खुद प्रहरी और कचेहरी! 2 - मूत्रमयी आज़ाद देशद्रोही - इनकी प्राथमिकता हर समय, हर जगह आज़ादी, ये अपने मूत्र को गंगा समझते हैं, और पुरे देश को रोज पवित्र करने का बीड़ा इनके हाथ है, उसी हाथ से ये बाकी काम भी करते हैं, ये अधिकतर मर्द होते हैं! 3- पूंजीवादी देशद्रोही - व्याख्या की जरुरत नहीं 4- टीवी देशद्रोही - ये सबसे ताजे देशद्रोही हैं, ताकतवर हैं, ये भगवान का बाज़ारी रूप हैं, 24 घंटे आपके रिमोट के अंदर रहते हैं ये पंडे हैं, आग और घी दोनों का मिश्रण इनको जीवन देता है! 5- मध्यमवर्गी देशद्रोही - ये गुस्सा में हैं, क्...

भेड़चाल क्या सवाल?

चलो फ़िर एक साल हो गया पेड़ से टूटा जैसे कोई छाल किसी के हाथों इस्तेमाल कौन सी बड़ी बात है जैसे चल पड़ी कोई अटकी हुई रात है , या मुँह मांगी सौगात है चल दिये उठ कर जैसे कुछ खत्म हो गया जख्म किसका था फ़क़्त एक निशां हो गया तमाम उम्मीदें , चंद हालात , और बिखरे पल चलने को तैयार एक और झोला हो गया ! लम्हे अधुरे रह गये उनका क्या कीजे काबिल कश्तियों को तिनका का दीजे , बाकी सब ठीक है यारब मेरे , मनमर्ज़ी कायनात को पैजामा का कीजे ! दिन बदलने से तारीख़ नहीं बदलती , करवट लेने से तासीर नही बदलती , मंशा , ज़ज्बा , और तमाम कोशिशें गिनती से कोई तामीर नहीं बदलती ! भेड़चाल है, फ़िर क्यों सवाल है, मुबारक हो आपको नया साल है!