बिखरे हैं, टूटे नहीं है, अपने ही साथ से छूटे नहीं हैं, साहिल हैं अपने ही समंदर हैं, कितने भंवर हैं जो अंदर हैं, चले हैं सब समेट कर, भटके नहीं हैं, सफर है रास्ते दिखते नहीं हैं, बनते हैं, हर कदम से, एक एक कदम पर बदल रहे हैं, जो बुन रहे हैं, वही बन रहे हैं!
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।