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कायकू?


चलता है वही,
जो चलता है,
किसका क्या जाता है?


बादल सच हुए,
बरस बरस के,
तरसे तर हो गए!








सिसकते पहाड़,
मिट्टी पत्थर सरकते,
आएं किसके रास्ते?

कितना ऊपर पहुंचे,
तरक्की तमाम,
नीचे गिरें धड़ाम!

सभ्यता में जानवर,
पालतू, आवारा,
जंगल,जंगली नागवारा!!


हाइवे लंबे लंबे,
दूरियाँ कम करते,
गांव के बीच से!



रोडोडोन्द्रों (बुरांश) फूल,
पैसा वसूल,
जो जैसा जहां है!


छुप रहे हैं सब?
बादल, आसमाँ, पेड़!
नज़र या नज़रिया?


ठंडा गरम
सूरज नरम
तुम हम!


लंबी चढ़ाई,
घुटनों से लड़ाई,
खुद पीठ थपथपाई!



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