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हट के, हठ से


एक शख्स, एक तआरुफ़, एक तआल्लुक, 
एक रास्ता, एक वास्ता, तमाम अफ़साने, 


....the continuing saga of a spark

एक कोशिश, एक कशिश, एक ख्वाइश
पैमाना-ए-जाँ को एक हसीं आजमाइश
.
...smiling to life

नज़र कहीं भी हो पैरों में ज़मीन है, 
मीठी भी उतनी जितनी नमकीन हैं!

आईनों से कहा-सुनी कि कितने हसीन हैं,
शुक्र है फ़िर भी मेरी नज़रों के शौकीन हैं!





.....and to herself 

साथ कोई हो रगों से वाकिफ़ होते हैं,
कोशिशें यूँ कि अपने मन-माफ़िक होते हैं!
....walking her own path



अपनी यकीनी के पूरे उस्ताद हैं,
तकरीर कहिये तो कलाबाज़ हैं!


.....negotiating
इज़हार-ए-मोहब्बत के खासे कमज़ोर हैं, 
नहीं टिकेंगे वो जिसके दिल में चोर है!


.....to be her own self
न सरहदों के हैं न सरहदों में हैं,
अपना निज़ाम है अपनी जिद्दों के हैं!

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