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2026 वही पुराना नया साल!



नया साल आया है,

लेकर वहीं पुराना सवाल आया है?

मणिपुर, गाजा, सूडान, का ख़्याल आया है,

देहरादून में त्रिपुरा की हत्या का बवाल आया है,



सेंगर के बलात्कार का नया हाल आया है?

वोट चोरी का क्या कोई निकाल आया है?

उमर की बेल को कोई मिसाल आया है?



जज साहेब बिके हुए हैं,

सत्ता नरभक्षी है,

कलेक्टर सारे डरे हुए हैं,

विपक्षी अपनी गद्दियों में धंसे हुए है,

पत्रकार सब दरबारी बने हुए हैं,

सरकार के इश्तहार बने हुए हैं!

आप और हम बॉटल में सड़ता अचार हुए हैं!




हिंदुत्व का चरम है,

और इसका कैसा मर्म है?

मुसलमान इंसान नहीं?

दलित का कोई संज्ञान नहीं?

औरत इज्ज़त है,

लूटने वाला सामान! नहीं?



झूठ का बोलबाला हो,

सच जैसे भुलावा हो,

तारीख़ बदली जाएगी,

भगवा इबारत आएगी,

बाकी रंग शहीद होंगे,

राम के सारे ईद होंगे!




फिर भी साल मुबारक हो,

देखिए वह जो पसंद हैं,

धागा किसी का हो,

आपकी पतंग है!

अच्छा है इतनी उमंग है,

सबका अपना ढंग है,

अपनी अपनी पसंद है,



हम(मैं भी) क्या करें,

जो करोड़ की मुट्ठी तंग है,

कपड़े उनके पैबंद हैं,

सारे फीके रंग हैं!


मुबारक 2026 मुबारक

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साफ बात!

  रोशनी की खबर ओ अंधेरा साफ नज़र आता है, वो जुल्फों में स्याह रंग यूंही नहीं जाया है! हर चीज को कंधों पर उठाना नहीं पड़ता, नजरों से आपको वजन नजर आता है! आग है तेज और कोई जलता नहीं है, गर्मजोशी में एक रिश्ता नज़र आता है! पहुंचेंगे आप जब तो वहीं मिलेंगे, साथ हैं पर यूंही नज़र नहीं आता है!  अपनों के दिए हैं जो ज़हर पिए है जो आपको कुछ कड़वा नज़र आता है! माथे पर शिकन हैं कई ओ दिल में चुभन, नज़ाकत का असर कुछ ऐसे हुआ जाता है!

जी हुज़ूर!

हुजूर भी हैं हम जीहुजूर भी हैं, पास हैं चाहे कितने दूर भी हैं! मंजूर भी हैं, नामंजूर भी हैं, अपनी खुशी से मजबूर भी हैं! कमजोर भी हैं और शूर भी हैं, बदलते लम्हों के मशकूर भी हैं! काबिल हैं दोनों अपने आप के, जरूरत नहीं फिर जरूर भी हैं! बेअदबी के कायल हैं दोनों, अपनी गुस्ताख़ी के शु'ऊर भी हैं! मलहम हैं तो नासूर भी हैं, इंसाँ हैं मखमली काफ़ूर नहीं हैं! शराफ़त नहीं है इस रिश्ते में, आम हैं हम खजूर नहीं हैं! मंज़िल नहीं रास्ते हैं रिश्ते, हमसफर हैं जन्नत जरूर नहीं हैं! साथ है यही मुकम्मल बात है, करवा की मंगल सूत्र नहीं है! बनी है वही बात जो बिगड़ी है, जेहन का क्या जज़्बात नहीं हैं?