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क्या जानें, कौन माने!!

जो आंखें देखती हैं, वही आंखें दिखती हैं! बात किस की है? ये सवाल किसका है? ये हाल किसका है? यूँ मलाल किसका है? जो देख रहा है, उसे देखते हैं! सच, अलग अलग देखते हैं! एक ही बात कहाँ है, इतना बड़ा जहां हैं? आप कहाँ पहुंचे, और वो रास्ता कहाँ है? मुसाफ़िर कई हों, रास्ते पर, पर सफ़र एक नहीं, असर? अंजाम? नज़र देखती है, नज़रिये से, ये ही ज़रिया है, आपका क्या? कहाँ पहुँचे हैं? पहुँचना कहाँ हैं? किस बात से तय? ओ तय बात क्या है? हूँऊं, ओह, क्या, वाह, अच्छा, शायद, याने, हज़ार ख़याल मन में, क्या जानें, कौन मानें?

देखा-देखी!

ख़्वाब में ख़्वाब को सच होते देखा, दूर थे फिर भी बहुत नज़दीक देखा! जब भी देखा उनको बड़ा मसरूफ़ देखा, कभी खुद को देखें, कभी मेरी तरफ देखा, जब भी देखा यकीनन गौर से देखा, कौन जाने आशिक कि गुनहगार देखा, जब भी देखेंगे तो मुस्करा देंगे, इस उम्मीद में एक उम्र देखा, नज़दीक से गुजरे ओ बड़ी दूर थे, समझ न आये उस अंदाज़ से देखा आइनों की जुबाँ कब सीखि है, ओ हम से ही पूछे हैं ऐसा क्या देखा, उनको देखा तो हरदम हंसी देखा, खुद को देखा तो हरदम यकीं देखा! हम देखते ही थे की उसने हमको देखा, समझ न आये, ‘देखा’ कि देखते देखा! उनकी नज़र से जब खुद को देखा, फ़िक्र देखी, फक्र देखा, असर देखा

नज़र नजरिया नज़रअंदाज़!!

अंदाज़ इ नज़र से क्या अंदाज़ लगाएं, दिल की सुनें या अपना दिमाग लगाएं! मोहब्बत हरदम एकतरफ़ा ही होती है एक दूसरे से हो ये महज़ इत्तफ़ाक़ है! क्यों अफ़सोस है की आप नज़रअंदाज़ हैं, मोहब्बत ज़ेब में रख घूमने की चीज़ नहीं! इश्क़ है तो इंकार नज़रअंदाज़ क्यों, प्यार एहसास है दिल धड़काता है, सामान नहीं जो ख़रीदा जाता है??? अंदाज़ लगाएं उनकी नज़र से या नज़रअंदाज़ करें, समझ नहीं आता कहाँ से अफ़साना ए आगाज़ करें! बहुत सी अदाएं उनकी ओ एक अंदाज़ ए नज़र, तमाम तूफ़ान पाल रहे हैं और उस पर ये कहर! सच है कि उसने हमें नज़र अंदाज़ किया हमने भी इस सच को नज़रअंदाज़ किया! यूँ अब उनकी नज़रों के अंदाज़ हो गए, नज़र आये नहीं की नज़र-अंदाज़ हो गए? जब से उनका अंदाज़-ए-नज़र देखा, अपने आप को नज़र अंदाज़ कर दिया! अंदाज ए नज़र को नज़रअंदाज़ कीजे, दिल की बात है दिल से समझ लीजे! अंदाज़ नज़र का नज़र अंदाज़ कर दिया, हमने आगाज़ किया उसने अंजाम दे दिया!

सफ़र, नज़र, असर, सहर, कहर

एक और सफर नज़र में है, एक और कदम असर में है, निकल पड़े हैं फिर रास्तों पे, एक और सुबह सहर पे है पलटते रास्ते, थके हुए सवाल, ऊंघती उमीदें, दम तोड़ते जज़्बात, बड़ते कदम, ललचाते प्रश्नचिन्ह, नज़र आसमान, ये एहसास असीमित संभावनाओं से कोई अवकाश नहीं, फिर भी कोई प्यास नहीं साहिल होने कि तमाम मुश्किलें हैं, क्या मुमकिन कोई आस नहीं? क्या नया क्या पुराना है करवट लिये दिन रात बैठे हैं लम्हे तैश में ऐठें हैं अपनों से दूर हो कर अपने ही पास बैठे हैं आपकी नजर है, आपकी परख है, आपकी कवायत है, आपका फरक है! किसकी गरज़ है, किसको कसक है, तज़ुर्बा किसका है, किसका सबक है! इंतज़ार पर यकीं  कोने में छुप कर बैठी हैं शामे हंसीं, नज़र के भागने से दिन नहीं बदलते सच बड़े महीन होते हैं, नाज़ुक सारे यकीं होते हैं, मेरे होने ना होने से क्या गर आपके पैर जमीन होते हैं! आईना चेहरा नहीं दिखाता, सच्चाई दिखाता है, दौर ही ऐसा है , सच पर किसको यकीं आये? ख्याल सबके पैर पसारे हैं, आप क्यों बैठे किनारे हैं तजुर्बे आपके भी अल्फाज़ मांगते हैं कौन कहता है आप बेचारे हैं !