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कुछ होने का सफ़र!

किसकी सुनें

क्या तुम को एहसास है, बात तुम में भी खास है
जिनको नहीं दिखता उनको कहो की घांस है


 जो दिखता है  सच है सच के सिवा कुछ नहीं . . .

तुम सच हो किसी की राय नहीं,
दूसरे के समझ की सराय नहीं
सच के हिस्से नहीं होते,
मुश्किल समझना है वर्ना किस्से नहीं होते 

खुद को मुश्किल मत करो, आज को कल मत करो, 
गुजरा है वो पल है,
उसको (कर्मों का) फल मत करो


साथ चलोगे तो समझोगे


एक पंछी की उड़ाने, कौन समझे कौन जाने
कैसे पहचानेंगे वो जो तेरे पंखों से अंजाने

कदम कहाँ, नजर कहाँ, खबर कहाँ, कहाँ निशां
बदल रही है अब दिशाएँ, कौन सा है अब जहाँ.





तैयारी   है? 
मोड़ मिले तो मुड़ जाना, नए रास्तों से जुड़ जाना
धुंढ लेगी जिन्दगी तुमको, पंख मिले तो उड़ जाना

लगता है जिन्दगी में कुछ बदलाव आया है,
काम आप लोगों का लगाव आया है
कुदरत से सवालों का जवाब आया है
बिना मुश्किल कब आसमान का अंदाज़ आया है
 

रास्ता हमसफ़र हो तो सफ़र क्या कीजे,
ज़र्रा कायनात हो तो तो नजर क्या कीजे
बूँद समंदर है फरक क्या कीजे,
सब आप का अक्स है फ़रज का कीजे


ख़ामोशी एक जुबान होती है, 
गुजरे लम्हे तो शाम होती है 
घड़ियाँ गिनने से क्या हासिल

मुश्किल होने की या खोने की?
जिन्दगी आपके रस्ते होती है, मुश्किलें आपके वास्ते
तजुर्बे की फसल तैयार होती है जरा आस्ते

खा लीजिये आज जो मिले नाश्ते
दिन को साथ रखा है, न नज़र को बाज़ रखा है,
वक़्त गुजरने की सी चीज़ है, कौन जाने कहाँ आज रखा है....

गुजरता वक़्त सिमटते लम्हे, एक और रात होने को आई...
मशकूर इतना कुछ युहीं, अपनी ही तन्हाई नज़र नहीं आई...





पहचान एक भुलावा है!
हर शख्स आइना है गर तू मिल

कितनी जिन्दगी हुई तमाम, 

अब मिली है ये शाम
लम्हे गुजर न जाएँ सारे, 

रखना जरा वक्त को थाम

मुलाकात हुई है सो नया है रास्ता, 

मजे से करना लम्हों का नास्ता
जमीं से जुड़ना ख्यालों में उड़ना
गर मिल गया, कोई नया मोड़

बिना डरे  मुड़ना



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